Bihar High Court: बिहार में सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हजारों परिवारों के लिए पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी मृत सरकारी कर्मी के आश्रितों में से एक सदस्य पहले से ही सरकारी सेवा में है, तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं मिलेगा। यह निर्णय उन मामलों में भी लागू होगा जहां सरकारी नौकरी में कार्यरत भाई या बहन परिवार से अलग रहता है या उनका भरण-पोषण नहीं करता।
बड़ी खबर! बिहार में अब नहीं मिलेगी अनुकंपा नौकरी, हाई कोर्ट ने सुनाया ये कड़ा फैसला
Bihar Compassionate Appointment: बिहार में सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे कई परिवारों को पटना हाई कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मृत सरकारी कर्मी का एक आश्रित पहले से सरकारी सेवा में है, तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नौकरी नहीं मिलेगी। इस निर्णय का सीधा असर ऐसे सैकड़ों मामलों पर पड़ेगा जहां परिवार के सदस्य इस नियम में छूट की उम्मीद कर रहे थे।






अनुकंपा नौकरी पर हाई कोर्ट का सख्त रुख
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति केवल सहानुभूति के आधार पर दी जाती है, यह कोई उत्तराधिकार का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों में अगर कोई एक भाई या बहन पहले से ही सरकारी सेवा में कार्यरत है, तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल सकता। यह व्यवस्था बिहार में सरकारी नौकरियों में आश्रितों की नियुक्ति के नियमों को और अधिक कठोर बनाएगी।
“यदि मृत सरकारी कर्मी का एक आश्रित पहले से सरकारी सेवा में है, तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा पर रोजगार का अधिकार नहीं मिल सकता। यह सहानुभूति पर आधारित है, उत्तराधिकार का अधिकार नहीं।”
अलग रहने पर भी नहीं मिलेगी छूट
कई मामलों में आश्रित यह दलील देते थे कि भले ही उनका भाई या बहन सरकारी नौकरी में हो, लेकिन वह उनसे अलग रहता है या परिवार का भरण-पोषण नहीं करता। पटना हाई कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सरकारी सेवा में कार्यरत भाई या बहन के अलग रहने या परिवार का भरण-पोषण न करने की स्थिति में भी दूसरे आश्रित को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी का अधिकार नहीं मिलेगा। इस निर्णय ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित मानदंडों को और अधिक स्पष्ट और सीमित कर दिया है।
फैसले का दूरगामी असर
इस फैसले से उन सभी आवेदकों को निराशा हाथ लगेगी, जो परिवार के एक सदस्य के सरकारी नौकरी में रहते हुए भी दूसरे सदस्य के लिए अनुकंपा नियुक्ति की उम्मीद कर रहे थे। हाई कोर्ट का यह रुख सरकारी विभागों में अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक नई दिशा तय करेगा और भविष्य में ऐसे मामलों में विवादों को कम करने में सहायक होगा। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करना है, न कि सभी आश्रितों को सरकारी नौकरी देना।
अनुकंपा नियुक्ति पर Bihar हाई कोर्ट का स्पष्टीकरण
पटना हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लेकर लंबे समय से चली आ रही एक दुविधा को समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों में से कोई एक भाई या बहन सरकारी नौकरी में कार्यरत है, तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी का अधिकार नहीं मिल सकता। यह व्यवस्था सहानुभूति पर आधारित है, न कि उत्तराधिकार के अधिकार पर।
अलग रहने पर भी लागू होगा यह नियम
अदालत ने साफ तौर पर कहा कि यह नियम तब भी प्रभावी रहेगा, जब सरकारी सेवा में कार्यरत भाई या बहन परिवार से अलग रहता हो। इसके अलावा, यदि वह परिवार का भरण-पोषण नहीं भी करता है, तब भी दूसरे आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति का दावा करने का अधिकार नहीं होगा। यह फैसला उन सभी आवेदनों पर सीधा असर डालेगा जो इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे थे कि उनका सरकारी नौकरी वाला भाई परिवार का सहयोग नहीं कर रहा है।
“मृत सरकारी कर्मी के आश्रितों में यदि कोई एक भाई या बहन सरकारी सेवा में कार्यरत है, तो केवल इस आधार पर कि वह अलग रहता है या परिवार का भरण-पोषण नहीं करता, दूसरे आश्रित को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी का अधिकार नहीं मिल सकता। अनुकंपा नियुक्ति सहानुभूति पर आधारित है, उत्तराधिकार का अधिकार नहीं।”
अनुकंपा नियुक्ति: अधिकार नहीं, सिर्फ सहानुभूति
पटना हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मूल सिद्धांत को भी रेखांकित किया है। कोर्ट ने दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य अचानक परिवार के मुखिया की मृत्यु से उत्पन्न हुई आर्थिक कठिनाइयों को दूर करना है। यह कोई उत्तराधिकार का अधिकार नहीं है, जिसे मृतक के वारिस मांग सकें। यदि परिवार में पहले से ही कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है, तो यह माना जाएगा कि परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं है।
इस फैसले से अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में पारदर्शिता और एकरूपता आने की उम्मीद है। यह राज्य सरकार को ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान करेगा और भविष्य में होने वाले मुकदमों को कम करने में भी सहायक होगा।








