Bihar Congress: आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावों को देखते हुए बिहार कांग्रेस अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। पार्टी आलाकमान के निर्देश पर बिहार कांग्रेस ने अपने जमीनी संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी है। इसी कड़ी में राजधानी पटना के सदाकत आश्रम में बिहार कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के कोने-कोने से आए जिला अध्यक्षों ने हिस्सा लिया और संगठन की जमीनी हकीकत की रिपोर्ट आलाकमान के सामने रखी।







बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने साफ कर दिया कि पार्टी का पूरा ध्यान फिलहाल सिर्फ संगठन को मजबूत करने पर है। उन्होंने कहा कि पार्टी अब सिर्फ ऊपर-ऊपर की राजनीति करने के बजाय सीधे जमीन पर उतरकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेगी।
अब काम के आधार पर रैंकिंग: लागू हुआ ‘ग्रेडिंग सिस्टम’
इस बैठक की सबसे बड़ी और खास बात यह रही कि कांग्रेस ने अब अपने नेताओं और जिला अध्यक्षों की जवाबदेही तय करने के लिए एक कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने घोषणा की कि पार्टी ने जिला स्तर के कामकाज को आंकने के लिए तीन बिंदुओं पर आधारित एक विशेष ‘ग्रेडिंग सिस्टम’ लागू किया है। इस ग्रेडिंग सिस्टम के तहत मुख्य रूप से तीन चीजों का मूल्यांकन किया जाएगा:
- **राजनीतिक कार्यक्रम:** जिला अध्यक्ष अपने-अपने इलाकों में पार्टी के कितने कार्यक्रम और बैठकें आयोजित कर रहे हैं।
- **स्थानीय स्तर पर गतिविधियां:** जनता के स्थानीय मुद्दों पर जिला कमिटी कितनी सक्रिय है और क्या वह सड़कों पर उतर रही है।
- **संगठन विस्तार:** संगठन विस्तार के तहत कितने नए लोगों और युवाओं को पार्टी से जोड़ा जा रहा है और नए सदस्यों की संख्या कितनी है।
राजेश राम ने कड़े लहजे में कहा कि अब सिर्फ पद पर बैठे रहने से काम नहीं चलेगा। हर महीने सभी जिला अध्यक्षों से उनके काम की प्रोग्रेस रिपोर्ट ली जाएगी। जो जिला अध्यक्ष बेहतर काम करेंगे, उन्हें अच्छी ग्रेडिंग मिलेगी और जो ढिलाई बरतेंगे, उन पर गाज भी गिर सकती है। कई जिलों में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान की शुरुआत पहले ही हो चुकी है और इसके साथ ही पार्टी की संपत्तियों की भी समीक्षा की जा रही है।
दो चरणों में बुलाई गई बैठक, खड़गे के निर्देश पर ‘मिशन बूथ’
संगठनात्मक समीक्षा की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिहार कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने इस बैठक को दो चरणों में आयोजित करने का फैसला किया है। पहले चरण की बैठक में राज्य के आधे से अधिक जिलों के अध्यक्ष शामिल हुए, जिनसे वन-टू-वन बात करके उनके क्षेत्र की समस्याओं और फीडबैक को नोट किया गया। बाकी बचे जिलों के अध्यक्षों को दूसरे चरण की बैठक में बुलाया गया है।
बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि हालिया चुनाव परिणामों की गहन समीक्षा के बाद, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और केंद्रीय नेतृत्व के विशेष निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य केवल जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक अपनी कमेटियों को पुनर्जीवित करना है, ताकि चुनाव के समय पोलिंग बूथ पर पार्टी का झंडा संभालने वाले मजबूत कार्यकर्ता मौजूद रहें।
‘जब तक दोनों पैर मजबूत नहीं होते, तब तक आगे की रणनीति नहीं’
बैठक के दौरान राजेश राम ने एक बेहद दिलचस्प और व्यावहारिक बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस अब बैसाखी के सहारे चलने के बजाय बिहार में अपने दम पर एक मजबूत ताकत बनने की कोशिश में है।
जब तक इंसान के दोनों पैर मजबूत नहीं होते, वह लंबी दौड़ नहीं लगा सकता। कांग्रेस के लिए उसके ‘दोनों पैर’ का मतलब है—उसका संगठन और उसके समर्पित कार्यकर्ता। जब तक ये दोनों पूरी तरह मजबूत नहीं हो जाते, तब तक हम आगे की बड़ी राजनीतिक रणनीति या गठबंधनों पर विस्तार से काम नहीं करेंगे।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन के बिना कोई भी चुनाव नहीं जीता जा सकता।
जनसरोकार के मुद्दों पर जारी रहेगा संघर्ष
संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ बिहार कांग्रेस ने जनता के मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। प्रदेश अध्यक्ष ने याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी लगातार छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे, एलपीजी गैस की बेतहाशा बढ़ती कीमतें, NEET पेपर लीक का मामला और पुलिसिया कार्रवाई जैसी आम जनता से जुड़ी समस्याओं पर सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करती रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस का यह संघर्ष और तेज होगा। पार्टी हर उस मोर्चे पर खड़ी रहेगी जहाँ जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की जाएगी।









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