Jale Nagardih Road: बिहार के बिहार में ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़कें अक्सर खबरों में रहती हैं, लेकिन जाले प्रखंड के नगरडीह गांव की मुख्य सड़क पर जलजमाव ने ग्रामीणों का जीवन दुश्वार कर दिया है। बारिश होते ही यह सड़क तालाब में बदल जाती है, जिससे आवागमन तो मुश्किल होता ही है, स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी यह जानलेवा साबित हो रही है। कई बार छोटे बच्चे गड्ढों में गिरकर घायल हो चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा आक्रोश है।
जाले की इस सड़क पर चलना मौत को बुलावा! बच्चे गिरकर हो रहे घायल, प्रशासन कब जागेगा?
Jale Road Waterlogging: बिहार के जाले प्रखंड स्थित काजी-बहेड़ा पंचायत के नगरडीह गांव में हल्की बारिश भी ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन जाती है। गांव की मुख्य सड़क पर जलजमाव के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। मध्य विद्यालय नगरडीह के पास तो स्थिति और भी भयावह है, जहां सड़क पूरी तरह टूट चुकी है और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है। स्थानीय लोगों और स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को इस बदहाल सड़क पर चलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।






ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। कई बार छोटे बच्चे इन गड्ढों में गिरकर घायल हो चुके हैं, जिससे उनके अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। पूर्व मुखिया महेश प्रसाद ने बताया कि यह सड़क मुख्यमंत्री ग्रामीण संपर्क सड़क योजना के प्रथम चरण में बनी थी। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे नाला नहीं होने और आसपास के घरों का सड़क से ऊंचा होने के कारण गांव के प्रवेश से निकास तक कई जगह पानी जमा रहता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से सड़क लगातार क्षतिग्रस्त हो रही है।
नगरडीह में जलजमाव: सड़क जर्जर, प्रशासन बेखबर
महेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में वे बारिश के बाद सड़क किनारे जमा मिट्टी को हटवाकर पानी निकासी की व्यवस्था करते थे। हालांकि, उन्होंने वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों पर इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई पहल न करने का आरोप लगाया है। यह स्थिति स्थानीय प्रशासन की उदासीनता को भी दर्शाती है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
ग्रामीण सह भाजपा कार्यकर्ता रामाश्रय साह ने कहा, ‘गांव की मुख्य सड़क लंबे समय से जर्जर है। विधानसभा चुनाव के दौरान हमने स्थानीय विधायक जीवेश कुमार से सड़क के सुदृढीकरण की मांग की थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।’
बरसों पुरानी समस्या से जूझ रहे ग्रामीण, उठाई नाला निर्माण की मांग
नगरडीह के ग्रामीण अब इस समस्या से पूरी तरह आजिज आ चुके हैं। उनकी मुख्य मांग है कि गांव की मुख्य सड़क का जल्द से जल्द सुदृढीकरण कराया जाए और सड़क के दोनों ओर नाले का निर्माण हो, ताकि जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है, जिससे बच्चों और आम जनता को सुरक्षित आवागमन मिल सके और कोई बड़ी दुर्घटना न हो।
पूरी तरह जर्जर हो चुकी है जाले नगरडीह रोड
जाले प्रखंड की काजी-बहेड़ा पंचायत के नगरडीह गांव में बारिश का पानी निकलने की उचित व्यवस्था नहीं है। मध्य विद्यालय नगरडीह के पास तो स्थिति और भी खराब है, जहां लगातार जलजमाव के कारण सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह बड़े और गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे पैदल चलना भी बेहद कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे नाला नहीं होने और आसपास के घरों का स्तर सड़क से ऊंचा होने के कारण गांव के प्रवेश से लेकर निकास तक कई स्थानों पर पानी जमा रहता है। जल निकासी के अभाव में सड़क लगातार टूट रही है।
पूर्व मुखिया ने की थी पहल, वर्तमान प्रतिनिधि उदासीन
पूर्व मुखिया महेश प्रसाद ने बताया, “मुख्यमंत्री ग्रामीण संपर्क सड़क योजना के पहले चरण में इस सड़क का निर्माण हुआ था। मेरे कार्यकाल में बारिश के बाद सड़क किनारे जमा मिट्टी हटवाकर पानी निकासी की व्यवस्था की जाती थी।”
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई पहल नहीं की है। उनकी उदासीनता से ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्रामीण और भाजपा कार्यकर्ता रामाश्रय साह ने बताया
ग्रामीण और भाजपा कार्यकर्ता रामाश्रय साह ने बताया कि गांव की मुख्य सड़क लंबे समय से जर्जर है। उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान स्थानीय विधायक जीवेश कुमार से सड़क के सुदृढ़ीकरण की मांग की थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों की बार-बार की गुहार अनसुनी की जा रही है, जिससे उनके सब्र का बांध टूट रहा है।
सड़क सुदृढ़ीकरण और नाला निर्माण की मांग
नगरडीह के ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मुख्य सड़क के सुदृढ़ीकरण और दोनों ओर नाला निर्माण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब तक पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, तब तक यह समस्या बनी रहेगी और उनके बच्चों का भविष्य भी खतरे में रहेगा। इस मांग पर जल्द से जल्द कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है ताकि ग्रामीण जलजमाव और जर्जर सड़क से निजात पा सकें।








