Bhagalpur University Protest: भागलपुर: भागलपुर के तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) परिसर में स्थित अल्पसंख्यक छात्रावास में अवैध कब्जे को लेकर छात्र जदयू ने जोरदार प्रदर्शन किया है। एक दिवसीय इस धरने में बड़ी संख्या में छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया, विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई। छात्रों ने आरोप लगाया कि छात्रावास में वास्तविक जरूरतमंदों को आवास नहीं मिल रहा है, क्योंकि नियमों की अनदेखी कर अवैध कब्जा जमाया गया है।
छात्र जदयू के विश्वविद्यालय अध्यक्ष मोहम्मद एहसान उल राजा उर्फ डेविड के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा कि छात्रावास के अधीक्षक की मिलीभगत से यह अवैध कब्जा हुआ है। उनका दावा है कि छात्रावास छात्रों के हितों के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति में इसका मूल उद्देश्य ही खत्म हो गया है।






अधीक्षक पर मिलीभगत का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
धरना प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जा तुरंत हटाया जाए और इसमें शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रावास व्यवस्था में पारदर्शिता लाना अनिवार्य है ताकि पात्र छात्रों को उनका हक मिल सके। इस प्रदर्शन में विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के छात्र और कई सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में छात्रों के अधिकार सुनिश्चित करने की बात कही।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो छात्र जदयू चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकार और छात्रावास व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है।
पारदर्शिता की मांग, आगे क्या होगा?
यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़े एक गंभीर मुद्दे को उजागर करता है। अब सभी की निगाहें तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है। छात्रों की मांग है कि अवैध कब्जे को हटाकर छात्रावास को उसके मूल उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाए और व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता लाई जाए ताकि कोई भी जरूरतमंद छात्र आवास से वंचित न रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन पर इस मामले में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।








