Jollywood Music Industries Scam: बिहार में एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें लाखों लोगों को ‘वीडियो देखकर हर महीने 15 हजार रुपये कमाने’ का झांसा देकर 20 करोड़ रुपये की कथित ठगी की गई है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमालपुर और आसपास के चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब यह जांच मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से की जा रही है, जिससे निवेशकों की करोड़ों रुपये की रकम के ठिकाने का पता चल सके।
सुबह 6 बजे से ED का एक्शन: कहां-कहां हुई छापेमारी?
गुरुवार सुबह करीब 6 बजे ईडी की टीम ने जमालपुर और मुंगेर के चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। कंपनी के सीएमडी जितेंद्र कुमार राजीव के नया टोला फुलका स्थित आवास पर छापा मारा गया। इसके साथ ही, जयधन तांती, राजा साव, धरहरा के सारोबाग स्थित संतोष तांती और ईस्ट कॉलोनी के सिकंदरपुर स्थित सॉफ्टवेयर इंजीनियर धीरेन्द्र कुमार के ठिकानों की भी तलाशी ली गई।






छापेमारी के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण जब्त किए हैं। इनमें बैंक पासबुक, बैंक दस्तावेज, प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर ईडी अब यह पता लगा रही है कि निवेशकों से जुटाई गई 20 करोड़ रुपये की रकम को किन-किन खातों, संपत्तियों, कंपनियों या अन्य निवेश माध्यमों में पहुंचाया गया है।
लाखों को फंसाने का ‘वीडियो’ जाल: कैसे काम करती थी कंपनी?
जॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्रीज का यह नेटवर्क वर्ष 2013 में पटना से डीएलएमएस म्यूजिक के नाम से शुरू हुआ था। इसके बाद, 31 मई 2023 को जमालपुर के केएस कॉम्प्लेक्स में जॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्रीज का कार्यालय खोला गया। यहीं से एक आकर्षक योजना की शुरुआत हुई, जिसने बेरोजगार युवाओं, गृहिणियों, छोटे व्यापारियों और अतिरिक्त आय की तलाश कर रहे लोगों को तेजी से आकर्षित किया।
कंपनी दावा करती थी कि सदस्य बनने के बाद सिर्फ वीडियो देखकर हर महीने 15 हजार रुपये तक कमाए जा सकते हैं। इस योजना के तहत प्रत्येक सदस्य से लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये लेकर एक आईडी दी जाती थी, जिसके बाद 4800 वीडियो देखने पर मासिक आय का वादा किया जाता था।
कंपनी ने अपने नेटवर्क को तेजी से फैलाने के लिए ‘नेशनल’, ‘इंटरनेशनल’, ‘यूनिवर्सल’ और ‘सुदर्शन’ नाम से चार जोन बनाए थे। अकेले यूनिवर्सल जोन से ही मुंगेर और जमालपुर क्षेत्र के करीब दो लाख लोग जुड़े थे। बिहार सहित कई राज्यों में लगभग आठ लाख अन्य लोग इन जोनों के माध्यम से कंपनी से जुड़े थे, जिससे कुल मिलाकर करीब 10 लाख निवेशकों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
भुगतान का झांसा और फिर फरार: नवंबर में बंद हुआ था कार्यालय
ऐसी योजनाओं की तरह, जॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्रीज ने भी शुरुआत में कुछ निवेशकों को समय पर भुगतान कर विश्वास जीता। इससे लोगों को लगा कि यह एक विश्वसनीय योजना है और उन्होंने अपनी जमा पूंजी, बचत और यहां तक कि कर्ज लेकर भी निवेश करना शुरू कर दिया। प्रचार के लिए दर्जनों ‘सुपर वर्करों’ को ईएमआई पर कारें और कई लोगों को चारपहिया वाहन तक दिए गए, ताकि वे अधिक से अधिक लोगों को इस योजना से जोड़ सकें।
पूरा मामला उस समय गंभीर हो गया जब नवंबर में कंपनी का कार्यालय, संचालक का घर और उससे जुड़े अन्य प्रतिष्ठान अचानक बंद हो गए। इसके बाद सीएमडी जितेंद्र कुमार राजीव अपने परिवार के साथ फरार हो गया। निवेशकों को धीरे-धीरे एहसास हुआ कि उनके साथ बड़ी ठगी हो चुकी है। कई परिवारों की वर्षों की बचत एक झटके में फंस गई, और जिन लोगों ने अपने रिश्तेदारों व परिचितों को जोड़ा था, वे सामाजिक दबाव और आर्थिक संकट का सामना करने लगे।
कार्यालय बंद होने और संचालक के गायब होने के बाद, पीड़ित निवेशकों ने मो. तालिब के नेतृत्व में आदर्श थाना, जमालपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई। इस मामले में 82 पीड़ितों ने करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप लगाया था। बाद में पुलिस ने मुख्य आरोपी जितेंद्र कुमार राजीव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब ईडी की कार्रवाई से यह मामला सिर्फ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेन-देन की दिशा में भी जांच तेज हो गई है।
अब आगे क्या? ED जांच से क्या उम्मीद?
ईडी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की अब फॉरेंसिक जांच की जाएगी। बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेन-देन की पूरी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी की रकम को जमीन, फ्लैट, वाहन या अन्य कंपनियों में निवेश किया गया था या नहीं।
यदि मनी लॉन्ड्रिंग के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कंपनी से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। साथ ही, पीड़ित निवेशकों को उनकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया भी इस जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। इस मामले का जमालपुर और मुंगेर क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था और लोगों के भरोसे पर गहरा सामाजिक और आर्थिक असर देखा जा रहा है।








