Gobardhan Yojana: केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘गोबरधन योजना’ को मंजूरी दे दी गई है। यह योजना अगले दस वर्षों के लिए लागू की जाएगी, जिस पर कुल 23,731 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आएगा। इसका मुख्य लक्ष्य संपीड़ित बायोगैस (CBG) को भारत के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का एक प्रमुख स्तंभ बनाना है।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना कृषि अवशेष, पशु गोबर, चीनी मिलों के अपशिष्ट, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और ग्रामीण आय में बदलने का काम करेगी। इस पहल से घरेलू संपीड़ित बायोगैस उत्पादन में लगभग दस गुना वृद्धि होने की उम्मीद है, साथ ही बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित होगा और देशभर में पुनर्चक्रण जैव-अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा। यह योजना मौजूदा वित्त वर्ष से लेकर वित्त वर्ष 2035-36 तक प्रभावी रहेगी।






कैसे बदलेगी गांवों की तस्वीर?
गोबरधन योजना ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने का एक बड़ा माध्यम बनेगी। यह किसानों, फीडस्टॉक एकत्र करने वालों, सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर पैदा करेगी। योजना वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देगी, जिससे गांवों में स्वच्छता बढ़ेगी और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा, जैविक खाद अर्थव्यवस्था का विस्तार होगा, जो मिट्टी के स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए लाभदायक है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा, “मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय पुनर्चक्रण जैव ऊर्जा, गोबरधन योजना को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य कृषि अवशेष, पशु गोबर, चीनी मिलों के अपशिष्ट, नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य बायोमास संसाधनों को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और ग्रामीण आय में बदलना है।”
ऊर्जा मिश्रण में संपीड़ित बायोगैस की अहम भूमिका
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित यह बिहार समेत पूरे भारत में संपीड़ित बायोगैस मूल्य श्रृंखला के लिए एक एकीकृत ढांचा उपलब्ध कराएगी। इसमें सुनिश्चित मांग, स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, ऋण सहायता और प्रौद्योगिकी विकास शामिल हैं। सरकार ने सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) क्षेत्रों में संपीड़ित बायोगैस मिश्रण के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2027-28 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028-29 से आगे 5 प्रतिशत संपीड़ित बायोगैस मिश्रण अनिवार्य होगा।
यह पहल सतत वैकल्पिक परिवहन के लिए किफायती पहल (SATAT), जैविक खाद के लिए बाजार विकास सहायता योजना, बायोमास मशीनरी योजना, पाइपलाइन अवसंरचना विकास योजना और राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम के तहत संपीड़ित बायोगैस संयंत्रों के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता जैसी पहले की सफल पहलों पर आधारित है। इन प्रयासों से अब तक 200 से अधिक संपीड़ित बायोगैस संयंत्र चालू हो चुके हैं, जिससे उत्पादन और खरीद प्रणालियों को मजबूती मिली है और जैविक खाद मूल्य श्रृंखला का विकास हुआ है।
योजना के प्रमुख विकास इंजन और वित्तीय सहायता
गोबरधन योजना के तहत छह प्रमुख विकास इंजन इस क्षेत्र के विस्तार को गति देंगे। इनमें संपीड़ित बायोगैस खरीद आश्वासन ढांचा स्थापित करना शामिल है, जिसमें नगर गैस वितरण संस्थाओं द्वारा खरीद प्रमुख है। योग्य ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रतिदिन प्रति टन पर 2 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता दी जाएगी, और उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली ब्राउनफील्ड परियोजनाएं भी इसके लिए पात्र होंगी।
इसके अतिरिक्त, यह योजना संयंत्रों को ट्रंक पाइपलाइनों और नगर गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने वाली पाइपलाइन अवसंरचना को सहायता प्रदान करेगी। एमएसएमई आधारित परियोजनाओं के लिए एक समर्पित ऋण गारंटी तंत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार एक पारिस्थितिकी तंत्र चुनौती कोष भी स्थापित करेगी, जो फीडस्टॉक संसाधन आकलन, एकत्रीकरण अवसंरचना, जिला स्तर के संयंत्रों, विकास योजना, प्रौद्योगिकी अपनाने, जैविक खाद के मूल्य संवर्धन, क्षमता निर्माण और हितधारक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहायता देगा। यह योजना प्राकृतिक गैस की बढ़ती मांग को पूरा करके आयातित जीवाश्म ईंधनों पर देश की निर्भरता को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।








