Social Media Niyam ऑनलाइन कंटेंट हटाने की समय सीमा में भारी कटौती- कड़े नए नियम लागू! डीपफेक और AI वीडियो पर सरकार का सख्त फैसला, अब 2 घंटे में होगा डिलीट। सरकार का यह फैसला ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देने और यूजर्स को हानिकारक सामग्री से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
: सरकार ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और संवेदनशील ऑनलाइन कंटेंट से निपटने के लिए कड़े नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत, अब प्लेटफॉर्म्स को संवेदनशील मामलों से जुड़ी सामग्री को 24 घंटे के बजाय सिर्फ 2 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। यह बड़ा बदलाव डीपफेक, एआई-जनरेटेड वीडियो और अन्य गलत पहचान वाले कंटेंट के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए किया गया है, जिससे सोशल मीडिया यूजर्स को तत्काल राहत मिलेगी।






ऑनलाइन कंटेंट हटाने की समय सीमा में भारी कटौती
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट को लेकर अपनी अनुपालन नीतियों को और मजबूत किया है। अब इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सरकार या अदालत के आदेशों पर आधारित गैर-कानूनी जानकारी को 36 घंटे से घटाकर मात्र 3 घंटे में हटाना होगा। यह कदम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को बढ़ाता है और आपत्तिजनक सामग्री पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
डीपफेक और गलत पहचान पर सख्त नियम
शिकायतों के समाधान के लिए भी नई समय-सीमा तय की गई है। नग्नता या गलत पहचान जैसी खास श्रेणियों से जुड़ी शिकायतों का समाधान अब 72 घंटे के बजाय 36 घंटे में करना होगा। वहीं, संवेदनशील मामलों के लिए यह समय-सीमा 24 घंटे से घटाकर सिर्फ 2 घंटे कर दी गई है। इन बदलावों से डीपफेक और एआई-जनरेटेड कंटेंट के माध्यम से फैलने वाली भ्रामक और हानिकारक जानकारी पर अंकुश लगेगा।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘अनुपालन के लिए समय-सीमा को और मजबूत किया गया है। इसमें सरकार या अदालत के आदेशों से मिली सही और ठोस जानकारी के आधार पर गैर-कानूनी जानकारी को हटाने की समय-सीमा (36 घंटे से घटाकर तीन घंटे) और शिकायतों के समाधान (नग्नता/ गलत पहचान जैसी खास श्रेणियों सहित) की समय-सीमा (72 घंटे से घटाकर 36 घंटे और संवेदनशील मामलों के लिए 24 घंटे से घटाकर दो घंटे) शामिल हैं।’
सरकार का यह फैसला ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देने और यूजर्स को हानिकारक सामग्री से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सख्त नियमों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया में तेजी आएगी और गलत सूचना व डिजिटल दुर्व्यवहार पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई जा सकेगी।








