Bihar Kanwar Yatra: सावन के पवित्र महीने में मुंगेर जिले का कच्ची कांवरिया पथ इन दिनों ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंज रहा है। बाबा भोलेनाथ की असीम भक्ति में लीन शिवभक्त अपनी श्रद्धा को नए और अनोखे तरीकों से प्रकट कर रहे हैं। इसी क्रम में, एक ऐसी अद्वितीय कांवर ने सबका ध्यान खींचा है, जिसे देखकर हर कोई आश्चर्यचकित है।
कोलकाता से आए भक्तों की अनोखी श्रद्धा
इस वर्ष की बिहार कांवर यात्रा में कोलकाता से आए लगभग 60 शिवभक्तों के जत्थे ने एक अद्भुत मिसाल पेश की है। ये भक्त 110 किलोग्राम वजनी बाबा भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा को कांवर का रूप देकर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले हैं। केसरिया वस्त्रों में सजे ये कांवरिये अपने कंधों पर इस भारी प्रतिमा को संभाले हुए सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल भरकर आगे बढ़ रहे हैं।





110 किलो की शिव प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
यह विहंगम दृश्य रास्ते भर लोगों को भावविभोर कर रहा है और ‘बोल बम-बम भोले’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है। स्थानीय लोगों और अन्य कांवरियों का मानना है कि इतनी बड़ी और भारी प्रतिमा को कांवर के रूप में ले जाना अत्यंत दुर्लभ और श्रद्धा का एक अनुपम उदाहरण है। थकान को भूलकर, ये भक्त केवल बाबा की कृपा पर भरोसा करते हुए अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं।
कच्ची कांवरिया पथ पर आस्था का महाकुंभ
मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर इन दिनों सावन की आस्था अपने चरम पर है। हर तरफ केसरिया रंग और कांवरियों के समूह लगातार बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। इस माहौल में, कोलकाता के इस जत्थे की अनोखी कांवर ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया है। उनका यह संकल्प, सुल्तानगंज घाट से गंगाजल लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने का है। वे जहां भी रुकते हैं, वहां भक्ति का माहौल और भी गहरा हो जाता है।
सावन में बाबा भोलेनाथ की भक्ति में डूबे ये शिवभक्त अपनी श्रद्धा को इस अनोखे अंदाज में व्यक्त कर रहे हैं। मुंगेर का कच्ची कांवरिया पथ अब केवल कांवरियों का रास्ता नहीं, बल्कि आस्था का एक विशाल महाकुंभ बन चुका है। ‘बोल बम’ की गूंज के साथ यह विशाल कांवर आगे बढ़ रही है और बाबा बैद्यनाथ धाम तक पहुंचने का उनका पवित्र सफर जारी है।








