Bihar Politics: अभिनेता से नेता बने और तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अचानक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के पटना स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की। यह मुलाकात लंबी चली, जिसके बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने इसे ‘पूरी तरह व्यक्तिगत’ बताया। हालांकि, इस भेंट ने बिहार के सियासी गलियारों में कयासों का दौर शुरू कर दिया है।
लालू यादव और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच हुई इस बातचीत को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने इस मुलाकात को किसी भी राजनीतिक समीकरण से जोड़ने से साफ इनकार किया है, लेकिन उनके पुराने बयानों और हालिया राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए कई सवाल खड़े हो रहे हैं।





लालू प्रसाद से पुरानी दोस्ती और ‘गरीबों के मसीहा’ का जिक्र
मुलाकात के बाद बाहर निकले शत्रुघ्न सिन्हा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लालू यादव से उनकी दोस्ती बहुत पुरानी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लालू प्रसाद केवल उनके राजनीतिक परिचित नहीं, बल्कि उनके पारिवारिक मित्र भी हैं। सिन्हा ने लालू प्रसाद को ‘देश का बड़ा और कद्दावर नेता’ बताते हुए कहा कि लोग उन्हें ‘गरीबों का मसीहा’ मानते हैं। उन्होंने बताया कि जब भी वे पटना आते हैं, लालू प्रसाद से जरूर मुलाकात करते हैं। शनिवार को भी दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। इस दौरान सिन्हा ने लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना भी की।
प्रशांत किशोर के समर्थन से बढ़ी थी सियासी हलचल
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब बिहार की राजनीति में शत्रुघ्न सिन्हा की भूमिका को लेकर पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान उन्होंने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को अपना समर्थन दिया था। प्रशांत किशोर की जीत के बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने उनकी जमकर तारीफ भी की थी, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई थी।
एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा था, ‘एक बिहारी बाबू होने के नाते, मैं यह स्वीकार करता हूं कि आम जनता और बिहार में हमारे लोग पटना के बांकीपुर में आपकी शानदार जीत से बेहद खुश हैं। आपके कारण बांकीपुर आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। आपकी इस योग्य जीत ने लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी में उत्साह का संचार कर दिया है। अब आप न केवल हीरो हैं, बल्कि बिहार का भविष्य भी हैं। मेरी आशा, कामना और प्रार्थना है कि आप जनता से किए गए अपने वादों और अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।’
तेजस्वी और तेज प्रताप यादव की अनुपस्थिति
शत्रुघ्न सिन्हा ने भले ही इस मुलाकात को व्यक्तिगत बताया हो, लेकिन तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव दोनों ही इस दौरान लालू प्रसाद के आवास पर मौजूद नहीं थे। जानकारी के अनुसार, तेजस्वी राजनीतिक कार्यों से बाहर थे, जबकि तेज प्रताप भी पटना से बाहर बताए गए। इन अनुपस्थितियों ने भी इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थों को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुलाकात का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।








