Bihar Jail Manual: बिहार की जेलों में कैदियों के अनुशासन को लेकर बनाए गए नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। नए जेल मैनुअल के अनुसार, अब नियम तोड़ने वाले कैदियों को हथकड़ी और डंडा-बेड़ी नहीं लगाई जाएगी, जैसा कि पहले किया जाता था। इस फैसले से राज्य की बिहार की जेलों में अनुशासन बनाए रखने का तरीका बदल जाएगा।
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि कारा के अंदर मारपीट, तोड़फोड़ या अव्यवस्था फैलाने वाले कैदियों को अब मिलने वाली सुविधाओं और अधिकारों में कटौती का सामना करना पड़ेगा। उनकी कैंटीन और मनोरंजन की सुविधा एक महीने के लिए रोक दी जाएगी। साथ ही, उन्हें एक साल तक पैरोल भी नहीं मिल पाएगा।
मोबाइल मिला तो 3 साल की अतिरिक्त सजा
जेल के अंदर मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट मिलने पर कैदियों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी कैदी के पास मोबाइल फोन या ऐसा कोई उपकरण बरामद होता है, तो उसे 3 साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। यह सजा उसकी मौजूदा सजा के अतिरिक्त होगी। इसी तरह, जेल में मोबाइल या गैजेट की आपूर्ति करते पकड़े जाने वाले व्यक्ति को भी दो साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखे गए हैं। दोषी पाए जाने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है, या दोनों दंड मिल सकते हैं।
अनुशासन तोड़ने पर मिलेगी यह सजा
कैदियों द्वारा मचाए गए उत्पात या अपराध के हिसाब से उनके कैंटीन सहित अन्य मनोरंजन सुविधाएं एक महीने के लिए रोकी जा सकती हैं। परिजनों से मिलने-जुलने पर भी एक महीने की पाबंदी लगाई जा सकती है। इसके अलावा, उनके अर्जित परिहार (जेल से छूट) की जब्ती के साथ अगले तीन माह तक परिहार देने पर पाबंदी और एक साल के लिए पैरोल सुविधा पर भी रोक लग सकती है। अनुशासनहीन कैदियों को सामान्य बंदियों से अलग पृथक कारावास में रखने का भी प्रावधान किया गया है। काराधीक्षक को जेल के अंदर अनुशासन बनाए रखने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार बनाया गया है।
पहले जेल नियम तोड़ने पर 48 घंटे से अनाधिक समय के लिए हथकड़ी, भारी या कठोर श्रम के लिए पंद्रह दिनों तक काम में परिवर्तन, 15 दिनों के लिए हथकड़ी, 15 दिन से अनाधिक अर्जित परिहार की जब्ती और असाधारण परिस्थितियों में 30 दिन से अनाधिक अवधि के लिए डंडा-बेड़ी लगाने का प्रावधान था।
बार-बार नियम तोड़ने पर बढ़ेंगी मुश्किलें
नए Bihar Jail Manual के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति जेल का अनुशासन तोड़ने का अपराध बार-बार करता है, तो जेल अधीक्षक इसकी सूचना सक्षम न्यायिक दंडाधिकारी को देंगे। न्यायिक दंडाधिकारी ऐसे मामलों की सुनवाई करेंगे और दोषी पाए जाने पर आरोपी को तीन वर्ष तक की जेल की अतिरिक्त सजा हो सकेगी। यह सजा उस बंदी द्वारा पहले से भुगती जा रही अन्य सजा के अतिरिक्त होगी और मौजूदा सजा के बाद काटनी होगी।
नए नियमों के तहत मिलने वाले दंड
| दंड का प्रकार | अवधि |
|---|---|
| कैंटीन और मनोरंजन सुविधाओं पर रोक | एक माह |
| अर्जित परिहार की जब्ती | तीन महीने |
| परिहार पर रोक | तीन महीने तक |
| पैरोल सुविधा पर रोक | एक वर्ष |
| आगंतुकों से मिलने पर रोक (वकील छोड़कर) | एक माह से अधिक |
| पृथक कारावास | एक माह से अनाधिक |
यह नया जेल मैनुअल बिहार की जेलों में कैदियों के बीच अनुशासन बनाए रखने और अपराधों को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य कैदियों को शारीरिक दंड के बजाय अधिकारों और सुविधाओं से वंचित करके सुधारात्मक व्यवहार के लिए प्रेरित करना है।







