Bihar Police: भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीआईजी राकेश कुमार सिन्हा को ‘सराहनीय सेवा पदक’ से सम्मानित किया है। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान उनकी लगभग तीन दशकों की उत्कृष्ट और समर्पित पुलिस सेवा को मान्यता देता है। स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर इस सम्मान की घोषणा की गई, जिसे उनके लंबे करियर की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
डीएसपी से डीआईजी तक का लंबा सफर
राकेश कुमार सिन्हा ने 1999 में पुलिस सेवा में डीएसपी के रूप में कदम रखा था। उनकी पहली पोस्टिंग 2001 में झारखंड के दुमका में हुई थी। बाद में उन्हें बिहार कैडर मिला, जिसके बाद उन्होंने जहानाबाद, शेखपुरा, रोहतास, समस्तीपुर, जमुई, नालंदा, सुपौल और खगड़िया जैसे कई महत्वपूर्ण जिलों में अपनी सेवाएं दीं।

उन्होंने एसटीएफ (विशेष कार्य बल), बीपीए (बिहार पुलिस अकादमी), एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता), विशेष शाखा, मद्य निषेध इकाई, लोकायुक्त कार्यालय और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो जैसे संवेदनशील विभागों में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। 2012 में आईपीएस अधिकारी के रूप में पदोन्नत होने के बाद, उन्होंने विभिन्न पदों पर अपराध नियंत्रण, गंभीर मामलों की जांच, भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष भूमिका और अन्य सम्मान
राकेश कुमार सिन्हा की नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिसिंग के दौरान निभाई गई भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया है। वर्तमान में वे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में डीआईजी के पद पर कार्यरत हैं, जहाँ वे भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर मामलों की जांच में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
उनकी सेवाओं में चुनाव ड्यूटी भी शामिल रही है। पंजाब और गुजरात के चुनावों के दौरान उन्हें पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया था, जहाँ उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को सफलतापूर्वक संभाला। अब तक उन्हें कुल 32 प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं, जिनमें से छह बिहार के पुलिस महानिदेशक द्वारा प्रदान किए गए हैं। यह पदक उनकी बेदाग और सराहनीय सेवा का प्रमाण है।







