Bihar Poster War: आजादी के राष्ट्रीय पर्व से ठीक पहले खगड़िया जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बिहार की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। शहर के सबसे व्यस्त राजेंद्र चौक पर लगाए गए एक राजनीतिक बैनर ने सियासी गलियारों में बारूद की तरह आग लगा दी है। इस बैनर में देशभक्ति और विचारधारा को लेकर सीधे तौर पर ऐसी बातें लिखी गई हैं, जिसने पूरे बिहार में चर्चा का एक नया केंद्र पैदा कर दिया है।
‘मोहब्बत की दुकान’ बनाम ‘नफरत का बाजार’: राजेंद्र चौक पर दो फाड़ सियासत
यह पूरा विवाद खगड़िया शहर के प्रसिद्ध राजेंद्र चौक पर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा लगाए गए एक बड़े बैनर के बाद शुरू हुआ है। स्वतंत्रता दिवस के ठीक पहले सार्वजनिक रूप से लगाए गए इस बैनर को बहुत ही आक्रामक तरीके से दो हिस्सों में डिजाइन किया गया है। बैनर के एक हिस्से को ‘कांग्रेस परिवार’ नाम दिया गया है, जिसमें 1947 की आजादी, राष्ट्रीय ध्वज को देश की असली शान बताना, स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को नमन करना, ‘जय संविधान’ का नारा और राहुल गांधी की चर्चित लाइन ‘मोहब्बत की दुकान’ जैसे नारों को खूबसूरती से दर्शाया गया है।

‘जय गोडसे’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों से कांग्रेस का तीखा प्रहार
इस बैनर में विवाद और चर्चा की असली वजह इसका दूसरा हिस्सा है, जिसे कांग्रेस ने ‘संघ परिवार’ नाम दिया है। इस हिस्से में संघ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा राजनीतिक प्रहार किया गया है। बैनर में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश की आजादी की लड़ाई में संघ की भूमिका को लेकर बेहद कड़े सवाल खड़े किए गए हैं। इतना ही नहीं, इसमें ‘नफरत का बाजार’, ‘जय गोडसे’ और ‘अंधभक्त’ जैसे बेहद संवेदनशील और भारी शब्दों का खुलकर इस्तेमाल हुआ है। कांग्रेस ने विपक्षी विचारधारा पर संविधान को बदलने की आशंका से जुड़े गंभीर कटाक्ष भी किए हैं, जिससे इस राष्ट्रीय पर्व से पहले विवाद और गहरा गया है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि स्वतंत्रता दिवस केवल ढोल-नगाड़े बजाने का दिन नहीं है, बल्कि यह उन लोगों को याद करने का दिन है जिन्होंने देश के लिए जान दी और संविधान की रक्षा की। इसी संदेश को जनता के बीच ले जाने के लिए यह बैनर लगाया गया है।
चौराहे पर उमड़ी भीड़, भाजपा की रहस्यमयी चुप्पी
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सरेराह लगे इस बैनर को देखने के लिए राजेंद्र चौक पर राहगीरों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कांग्रेस के इस आक्रामक और सीधे हमले के बावजूद अभी तक भाजपा या संघ परिवार की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में इस चुप्पी ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है, जिससे यह ‘बिहार पोस्टर वॉर’ आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।







