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Madhubani Mithila Painting मधुबनी में रामायण की 108 मीटर लंबी पेंटिंग ने रचा इतिहास, अब घर बैठे विदेश में बिकेगी मिथिला कला! | ‘स्थानीय कला से वैश्विक बाजार’ तक ई-कॉमर्स की उड़ान

Madhubani Mithila Painting: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 108 मीटर लंबी रामायण आधारित मिथिला पेंटिंग ने रचा वर्ल्ड रिकॉर्ड। ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिए स्थानीय कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकेगी, बढ़ेगी कलाकारों की आय।

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Madhubani Mithila Painting: बिहार के मधुबनी जिले में 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर मिथिला की कला और संस्कृति को एक नई पहचान मिली। इस ऐतिहासिक दिन मिथिला पेंटिंग-सह-ई-कॉमर्स पोर्टल का विधिवत शुभारंभ किया गया। साथ ही, रामायण की संपूर्ण गाथा पर आधारित 108 मीटर लंबी विशाल मिथिला पेंटिंग ने वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। यह पहल मिथिला की समृद्ध कला परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए कलाकारों के लिए वैश्विक बाजार के द्वार खोल रही है।

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Madhubani Mithila Painting मधुबनी में रामायण की 108 मीटर लंबी पेंटिंग ने रचा इतिहास, अब घर बैठे विदेश में बिकेगी मिथिला कला! | 'स्थानीय कला से वैश्विक बाजार' तक ई-कॉमर्स की उड़ान

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रामायण की गाथा, 108 मीटर की कलाकृति: मिथिला पेंटिंग ने रचा इतिहास

इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रामचरितमानस पर केंद्रित 108 मीटर लंबी एक अद्भुत मिथिला पेंटिंग रही। इस विशाल कलाकृति में रामायण के 52 प्रमुख प्रसंगों को मिथिला चित्रकला की पारंपरिक शैली में जीवंत किया गया है। मिथिला चित्रकला संस्थान के लगभग 180 वर्तमान और पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं ने मिलकर मात्र चार दिनों के भीतर इस ऐतिहासिक कलाकृति को साकार किया।

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Madhubani Mithila Painting मधुबनी में रामायण की 108 मीटर लंबी पेंटिंग ने रचा इतिहास, अब घर बैठे विदेश में बिकेगी मिथिला कला! | 'स्थानीय कला से वैश्विक बाजार' तक ई-कॉमर्स की उड़ान

इस सृजनात्मक प्रयास को पद्मश्री बौआ देवी (वरीय आचार्य), पद्मश्री दुलारी देवी (आचार्य), पद्मश्री शिवन पासवान, डॉ. रानी झा, श्री संजय कुमार जायसवाल और श्री प्रतीक प्रभाकर (कनीय आचार्य) जैसे अनुभवी कलाकारों का कुशल मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। पेंटिंग के निर्माण के दौरान रामचरितमानस के श्लोकों और दोहों का पाठ भी किया गया, जिसने इसे दृश्य कला, साहित्य और आध्यात्मिक परंपरा का एक अनूठा संगम बना दिया।

वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के प्रतिनिधि श्री क्रिस्टोफर की उपस्थिति में इस 108 मीटर लंबी कलाकृति का विधिवत लोकार्पण और मानकीकरण किया गया। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी, मधुबनी को वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र और मेडल प्रदान किया गया, जो मिथिला चित्रकला की प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह अनूठी कलाकृति वर्तमान में मिथिला ललित कला संग्रहालय में प्रदर्शित है, जहाँ कला-प्रेमी और आमजन इसका अवलोकन कर सकते हैं।

‘स्थानीय कला से वैश्विक बाजार’ तक ई-कॉमर्स की उड़ान

जिला पदाधिकारी, मधुबनी श्री आनंद शर्मा के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत, मिथिला चित्रकला संस्थान के निदेशक, उप-निदेशक, लेखा पदाधिकारी और संबंधित कर्मियों के प्रयासों से मिथिला पेंटिंग-सह-ई-कॉमर्स पोर्टल विकसित किया गया है। 15 अगस्त को इसका लाइव प्रदर्शन और विधिवत उद्घाटन हुआ। यह डिजिटल मंच मिथिला के कलाकारों को अपनी पेंटिंग, हस्तशिल्प और अन्य कलात्मक उत्पादों को देश-विदेश के व्यापक बाजार तक सीधे पहुँचाने का अवसर प्रदान करेगा।

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पोर्टल के माध्यम से कलाकारों को उनकी कला का उचित मूल्य, नए ग्राहक और व्यापक बाजार की संभावनाएँ मिलेंगी, जिससे उनकी आय, पहचान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल मिथिला की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल युग से जोड़ते हुए ‘स्थानीय कला से वैश्विक बाजार’ तक पहुँच बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है।

मिथिला की कला को मिला मान, गणमान्य अतिथियों ने सराहा

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने मिथिला की कला और संस्कृति के इस विशिष्ट सम्मान की सराहना की।

माननीय राज्यसभा सांसद श्री संजय कुमार झा ने कहा, ‘मिथिला पेंटिंग केवल एक कला विधा नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। ऐसी पहल मिथिला की कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।’

माननीय मंत्री, भवन निर्माण विभाग, बिहार सरकार श्रीमती लेसी सिंह ने मिथिला की कला एवं संस्कृति की विशिष्ट पहचान की सराहना करते हुए इसके संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया। उन्होंने इसे कलाकारों की प्रतिभा, परिश्रम एवं सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

जिला पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने कहा कि मधुबनी की कला सदियों से अपनी विशिष्ट शैली और सांस्कृतिक गहराई के लिए प्रसिद्ध रही है। रामायण आधारित यह 108 मीटर लंबी कलाकृति मिथिला की कला परंपरा को नई ऊँचाई प्रदान करती है। उन्होंने जिला प्रशासन के उद्देश्य को दोहराया कि वे मिथिला की कला और कलाकारों को आधुनिक तकनीक और व्यापक बाजार से जोड़ना चाहते हैं।

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कार्यक्रम के दौरान मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया, जिनमें मिथिला चित्रकला संस्थान के त्रिवर्षीय डिग्री कोर्स और छह माह के सर्टिफिकेट कोर्स के विभिन्न सेमेस्टरों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी शामिल थे। सर्वाधिक उपस्थिति वाले छात्रों को भी सम्मानित किया गया। इस सफल आयोजन में श्री नीतीश कुमार, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-उप-निदेशक, मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी; श्री सुरेन्द्र प्रसाद यादव, लेखा पदाधिकारी; पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान; डॉ. रानी झा; श्री संजय कुमार जायसवाल; श्री प्रतीक प्रभाकर, कनीय आचार्य; रूपा कुमारी, सहायक; मो. सरफराज; मो. अरमान रजा; श्री अर्जुन कुमार; श्री नीतीश कुमार; श्री विकास कुमार गुप्ता एवं श्री अभिषेक कुमार, डाटा एंट्री ऑपरेटर सहित संस्थान के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह ऐतिहासिक उपलब्धि मधुबनी की कला, संस्कृति और कलाकारों को नई पहचान और नए अवसर प्रदान करेगी।

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