Bhagalpur Vishahari Puja: अंग प्रदेश के हृदय भागलपुर में ऐतिहासिक लोकपर्व विषहरी पूजा का भव्य शुभारंभ हो चुका है। सोमवार को विषहरी मैया के पट खुलते ही पूरा जिला आस्था और भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। विभिन्न थानों और मंदिरों में डलिया चढ़ाने तथा पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। मां मनसा और देवी विषहरी के जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा, जिससे भक्तिमय वातावरण बन गया है।
चंपानगर स्थित मुख्य विषहरी स्थान पर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जो इस पर्व की ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता को दर्शाती हैं। नवविवाहित जोड़ों ने मंदिर में आकर सुखी दांपत्य जीवन के लिए खोइच्छा भरी। दोपहर होते ही मंदिर परिसर में पारंपरिक बलिया (बलि प्रथा) चढ़ाने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यहां यह मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है, जिसके आभार स्वरूप श्रद्धालु छागड़ (बकरा) की बलि अर्पित करते हैं।
मनोकामना पूरी करती हैं मैया, नवविवाहित जोड़ों ने भरी खोइच्छा
चंपानगर के प्रमुख विषहरी स्थान पर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था दिख रही है। यहां भक्तजन अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मैया उनकी झोली भरती हैं। नवविवाहित जोड़े खास तौर पर आकर अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो इस पर्व को और भी विशेष बनाती है।
चंपानगर से मंदरोजा तक भव्य सजावट और मंजूषा कलाकृतियां
भागलपुर में केवल चंपानगर ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य प्रमुख विषहरी स्थानों पर भी पूजा की भव्य धूम देखी जा रही है। मंदरोजा स्थित विषहरी स्थान, भीखनपुर, स्टेशन चौक विषहरी मंदिर, मिरजानहाट और सबौर के मंदिरों में भी भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदरोजा विषहरी मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा और फूलों से सजाया गया है, जो रात में एक अलग ही छटा बिखेरता है। यहां मंजूषा कलाकृतियों के माध्यम से मां विषहरी और बिहुला-लखिंदर की अमर गाथा को दर्शाया गया है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं।
प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम, सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। सभी प्रमुख मंदिरों, खासकर चंपानगर में, जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही, सादे लिबास में महिला और पुरुष पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। मंदिर कमेटियों के स्वयंसेवक भी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने में सहयोग कर रहे हैं, जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। देर रात तक मां विषहरी की प्रतिमा के दर्शन और पारंपरिक दुधार्पण का सिलसिला जारी रहा, जो इस पर्व की गहरी आस्था को दर्शाता है।







