Indian Railways: भारतीय रेलवे ने वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों में लोको पायलटों की तैनाती के नियमों को कड़ा कर दिया है। अनुभव, सुरक्षा रिकॉर्ड और पर्याप्त आराम पर अब विशेष जोर दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत, केवल निर्धारित ग्रेड और अनुभव वाले लोको पायलटों को ही प्रीमियम यात्री ट्रेनों पर नियुक्त किया जाएगा। इन नए दिशानिर्देशों में लोको पायलटों और ट्रेन प्रबंधकों की तैनाती, उनके सुरक्षा रिकॉर्ड और अनिवार्य आराम अवधि को भी शामिल किया गया है। सभी क्षेत्रीय रेलवे को इन संशोधित मानदंडों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है, जिसका सीधा प्रभाव बिहार से गुजरने वाली ट्रेनों पर भी पड़ेगा।
प्रीमियम ट्रेनों के लिए अब कड़े नियम
संशोधित प्रणाली का विशेष प्रभाव वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों के क्रू सदस्यों की तैनाती पर पड़ेगा। भारतीय रेलवे ने इस बात पर जोर दिया है कि इन ट्रेनों का संचालन आवश्यक अनुभव और ग्रेड वाले लोको पायलटों द्वारा ही किया जाना चाहिए। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण यात्री सेवाओं को ऐसे क्रू द्वारा संभाला जाए, जो इन ट्रेनों की परिचालन आवश्यकताओं से भली-भांति परिचित हों। मेल और एक्सप्रेस सेवाओं पर मालगाड़ी के लोको पायलटों की तैनाती से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है।
आपात स्थिति के लिए अलग पैनल और अनिवार्य आराम
रेलवे बोर्ड ने क्षेत्रीय रेलवे को आपातकालीन आवश्यकताओं के लिए ए-ग्रेड मालगाड़ी लोको पायलटों का एक अलग पैनल तैयार करने का निर्देश दिया है। हालांकि, इस पैनल में शामिल पायलटों को भी अनिवार्य सुरक्षा जांच से गुजरना होगा। बिना निर्धारित सुरक्षा जांच पूरी किए किसी भी मालगाड़ी के लोको पायलट को मेल या एक्सप्रेस ट्रेन से नहीं जोड़ा जा सकता। इसका मतलब है कि अनुभवी मालगाड़ी चालक को यात्री सेवा के लिए नियुक्त करने की स्थिति में भी आवश्यक सुरक्षा आवश्यकताओं को पहले पूरा करना होगा।
नई SOP लोको पायलटों और ट्रेन प्रबंधकों के काम के घंटों और आराम की अवधि पर भी विशेष जोर देती है। जिन क्रू सदस्यों ने निर्धारित आराम की अवधि पूरी नहीं की है, उन्हें ड्यूटी पर नहीं लगाया जाएगा। यदि किसी क्रू सदस्य को पर्याप्त आराम के बिना ड्यूटी पर लगाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। आराम पर यह ध्यान थकान को रोकने के लिए है, ताकि परिचालन के दौरान ट्रेन क्रू की सतर्कता और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित न हो।
CMS से निगरानी और सुरक्षा रिकॉर्ड पर जोर
लोको पायलटों और ट्रेन प्रबंधकों की तैनाती व काम के घंटों की निगरानी के लिए क्रू मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) का उपयोग किया जाएगा। रेलवे ने अधिकारियों को क्रू ड्यूटी शेड्यूल की नियमित रूप से निगरानी और क्रॉस-चेक करने का निर्देश दिया है। यदि कोई लोको पायलट लगातार काम कर रहा है या उसे पर्याप्त आराम नहीं मिला है, तो उसकी ड्यूटी रोकी जा सकती है। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण यात्री सेवाओं का संचालन थके हुए क्रू सदस्यों द्वारा न किया जाए।
संशोधित दिशानिर्देश कथित तौर पर कुछ मेल और एक्सप्रेस सेवाओं पर मालगाड़ी के लोको पायलटों की तैनाती से संबंधित शिकायतों के बाद आए हैं। नए दृष्टिकोण के तहत, यात्री ट्रेनों के लिए लोको पायलटों का चयन करते समय वरिष्ठता, सुरक्षा रिकॉर्ड, प्रासंगिक परिचालन ज्ञान और अनुभव जैसे कारकों को अधिक महत्व दिया जाएगा। क्षेत्रीय रेलवे और क्रू लॉबी को नई प्रणाली को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है, खासकर प्रीमियम ट्रेनों में क्रू की तैनाती करते समय।
रेलवे बोर्ड का यह कदम ट्रेन संचालन को सुरक्षित और अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से है। वंदे भारत और अन्य प्रीमियम यात्री सेवाओं के लिए, केवल चालक की उपलब्धता ही निर्णायक कारक नहीं होगी। क्रू सदस्य का अनुभव, ग्रेड, सुरक्षा रिकॉर्ड, संबंधित संचालन का ज्ञान और पर्याप्त आराम भी तैनाती से पहले विचार किए जाएंगे। इस पहल से प्रीमियम और मेल-एक्सप्रेस ट्रेन संचालन में सुरक्षा मानकों को और मजबूत होने की उम्मीद है।







