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Utter Pradesh Politics यूपी में सियासी भूचाल! डिप्टी सीएम केशव मौर्य बोले- ‘हो सकता है अगली बार CM के रूप में आप देखें’ |पढ़िए -पुरानी ‘टीस’ और अंदरूनी कलह

Keshav Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही एक नई हलचल दिख रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सार्वजनिक मंच पर मुख्यमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर कर सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, जिसका सीधा असर 2027 के चुनाव पर पड़ सकता है।

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Keshav Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नहीं, बल्कि दो तरह की सियासत परवान चढ़ रही है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक दांव-पेंच जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल के भीतर भी मुख्यमंत्री पद को लेकर महत्वाकांक्षाएं उभर रही हैं। उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में तब हलचल तेज हो गई, जब केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री पद उनके मन में भी है।

हो सकता है अगली बार सीएम के रूप में आप देखें, हो सकता है कि आप किसी और रूप में देखें। मेरी भी महत्वकांक्षा मुख्यमंत्री बनने की है लेकिन सिर्फ मेरे चाहने से नहीं होगा। मेरी पार्टी का नेतृत्व तय करेगा। पार्टी का विधायक दल तय करता है। पहले हमारा लक्ष्य प्रचंड बहुमत लाना है। हमारी पार्टी में सामान्य से सामान्य कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाता है।

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केशव प्रसाद मौर्य ने एक इंटरव्यू में यह बयान दिया, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की भीतरी कलह एक बार फिर सामने आ गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री बनने की उनकी इच्छा सिर्फ उनकी व्यक्तिगत चाहत से पूरी नहीं होगी, बल्कि यह फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और विधायक दल ही करेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका पहला लक्ष्य 2027 में प्रचंड बहुमत हासिल करना है।

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यूपी में सीएम योगी के लिए नई चुनौती? केशव मौर्य ने खुलकर कहा- ‘मैं भी बनना चाहता हूं मुख्यमंत्री!’

Uttar Pradesh Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है। उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश में केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी महत्वाकांक्षा जगजाहिर कर दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनकी भी इच्छा मुख्यमंत्री बनने की है, हालांकि यह फैसला अकेले उनकी चाहत से नहीं होगा, बल्कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और विधायक दल ही अंतिम निर्णय लेगा।

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एक चैनल न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में केशव मौर्य का बड़ा बयान

हाल ही में एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में जब केशव प्रसाद मौर्य से पूछा गया कि वे कब तक उपमुख्यमंत्री बने रहेंगे, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया। मौर्य ने कहा कि उनकी भी मुख्यमंत्री बनने की चाहत है, लेकिन केवल चाहने से कुछ नहीं होता। उन्होंने जोर दिया कि उनका पहला लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल करना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भाजपा में सामान्य कार्यकर्ताओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलता है और केंद्रीय पर्यवेक्षकों के फीडबैक के बाद ही मुख्यमंत्री का नाम तय होता है।

हो सकता है अगली बार सीएम के रूप में आप देखें, हो सकता है कि आप किसी और रूप में देखें। मेरी भी महत्वाकांक्षा मुख्यमंत्री बनने की है लेकिन सिर्फ मेरे चाहने से नहीं होगा। मेरी पार्टी का नेतृत्व तय करेगा। पार्टी का विधायक दल तय करता है। पहले हमारा लक्ष्य प्रचंड बहुमत लाना है। हमारी पार्टी में सामान्य से सामान्य कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाता है।

मौर्य ने दावा किया कि भाजपा 2027 का चुनाव 2017 और 2022 से भी बड़े अंतर से जीतेगी। उन्होंने 2017 की तरह 2027 में भी बड़ी जीत लाने का लक्ष्य बताया।

योगी आदित्यनाथ से पुरानी ‘टीस’ और अंदरूनी कलह

उत्तर प्रदेश में 2017 से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच सब कुछ ठीक नहीं होने की खबरें आती रही हैं। 2017 में केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था और पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, लेकिन मुख्यमंत्री पद योगी आदित्यनाथ को मिला। पार्टी के संगठन से जुड़े एक नेता के अनुसार, तब से ही केशव मौर्य के मन में एक ‘टीस’ है, जिसे भरने के लिए उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया।

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2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद यह अंदरूनी कलह फिर से उभरने लगी थी। केशव प्रसाद मौर्य बैठकों से दूरी बनाने लगे और ‘संगठन सरकार से बड़ा है’ जैसे बयान देने लगे। सूत्रों के मुताबिक, तब दिल्ली के हस्तक्षेप से मामला शांत हो पाया था।

सीएम पद के लिए केशव मौर्य की दावेदारी के मायने

केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा का प्रमुख ओबीसी चेहरा माना जाता है और वे अमित शाह के करीबी भी बताए जाते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक को साधने की रणनीति के चलते उनके नाम की अटकलें तेज हो जाती हैं। हालांकि, अब सार्वजनिक मंचों पर केशव मौर्य और योगी आदित्यनाथ के बीच टकराव कम दिखता है, और मौर्य पार्टी के फैसलों का सम्मान करने की बात कहते हैं। उनके इस नए बयान ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, खासकर 2027 के चुनावों के मद्देनजर यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा आलाकमान इस महत्वाकांक्षा को कैसे साधता है।

कब तक उपमुख्यमंत्री बने रहेंगे केशव प्रसाद मौर्य?

जब केशव प्रसाद मौर्य से पूछा गया कि वह कब तक उपमुख्यमंत्री बने रहेंगे, तो उन्होंने अपनी मुख्यमंत्री बनने की चाहत को छिपाया नहीं। उन्होंने कहा कि सिर्फ चाहने से कुछ नहीं होता, बल्कि सबसे पहले प्रचंड बहुमत हासिल करना सबसे बड़ा लक्ष्य है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की कार्यप्रणाली का जिक्र करते हुए बताया कि पार्टी में सामान्य कार्यकर्ताओं को भी अवसर मिलता है और मुख्यमंत्री पद का अंतिम निर्णय विधायक दल के साथ-साथ केंद्रीय पर्यवेक्षकों के फीडबैक के बाद ही लिया जाता है।

मौर्य ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों से भी बड़े अंतर से 2027 का चुनाव जीतेगी। उन्होंने कहा कि बहुमत मिलने के बाद ही मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। उनके इस बयान ने योगी आदित्यनाथ के साथ उनके कथित मनमुटाव को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

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योगी आदित्यनाथ से टकरा रहे हैं केशव प्रसाद मौर्य?

उत्तर प्रदेश में 2017 से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच सब कुछ ठीक न होने की चर्चाएं आम रही हैं। भारतीय जनता पार्टी ने केशव प्रसाद मौर्य को ओबीसी चेहरे के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, लेकिन मुख्यमंत्री पद योगी आदित्यनाथ को सौंप दिया गया था। इस फैसले से केशव मौर्य के मन में ‘टीस’ रह गई थी, जिसे पार्टी ने उन्हें डिप्टी सीएम बनाकर भरने की कोशिश की।

2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी का उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद से केशव प्रसाद मौर्य बैठकों से दूरी बनाने लगे और बार-बार यह बयान देते रहे कि ‘संगठन सरकार से बड़ा है’। सूत्रों के अनुसार, इस आंतरिक खींचतान को शांत करने के लिए दिल्ली से हस्तक्षेप करना पड़ा था।

क्यों सीएम पद का सपना देखते हैं केशव प्रसाद?

भारतीय जनता पार्टी के संगठन से जुड़े एक नेता ने बताया, ‘केशव प्रसाद मौर्य बीजेपी के प्रमुख ओबीसी चेहरे हैं। साल 2017 में वह प्रदेश अध्यक्ष थे, तब बीजेपी को ऐतिहासिक जीत मिली थी। वह अमित शाह के करीबी बताए जाते हैं। 2017 में जब योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाया गया तब से ही केशव प्रसाद मौर्य के मन में एक टीस है, जिसे भरने के लिए पार्टी ने उन्हें डिप्टी सीएम बनाया। साल 2027 के चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक साधने की रणनीति के चलते उनके नाम की अटकलें तेज हो जाती हैं। अब सार्वजनिक तौर पर केशव मौर्य और योगी आदित्यनाथ कम टकाराते हैं। केशव मौर्य, बार-बार पार्टी के फैसले के सम्मान की बात कहते हैं।’

मौर्य के इस बयान से स्पष्ट है कि उनकी महत्वाकांक्षाएं अभी भी कायम हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस आंतरिक समीकरण को कैसे संभालता है और क्या केशव प्रसाद मौर्य की यह चाहत भविष्य में कोई नया राजनीतिक मोड़ लाती है।

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