Bihar SI Paper Leak: बिहार दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा में हुए कथित प्रश्नपत्र लीक मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी गई है। EOU ने पूर्णिया और गया में दर्ज दोनों मामलों की जांच एक साथ करने का फैसला किया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन दोनों घटनाओं के पीछे कोई साझा नेटवर्क या व्यक्ति शामिल हैं।
जांच अधिकारी वॉट्सऐप ग्रुप, मोबाइल फोन डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहनता से पड़ताल करेंगे। उनका मुख्य ध्यान इस बात पर होगा कि प्रश्नपत्र की तस्वीरें कैसे खींची गईं, उन्हें कैसे प्रसारित किया गया और क्या पूर्णिया से लीक हुआ प्रश्नपत्र गया में कथित सॉल्वर गैंग तक पहुंचा था।

पूर्णिया और गया के मामलों की एक साथ जांच
EOU ने पूर्णिया साइबर पुलिस स्टेशन और गया के रामपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज मामलों का जिम्मा संभाला है। दोनों मामलों से जुड़े जांच अधिकारियों को पटना बुलाया गया है। उनसे केस डायरी, जब्त की गई सामग्री की सूची, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और प्रारंभिक जांच के दौरान एकत्र किए गए फोरेंसिक साक्ष्य जमा करने को कहा गया है। EOU इन दोनों मामलों के सबूतों की एक साथ समीक्षा करेगी, ताकि यह स्थापित किया जा सके कि आरोपी व्यक्तियों के बीच कोई सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं और क्या एक ही नेटवर्क दोनों घटनाओं में शामिल था। जांच टीम प्रश्नपत्र की तस्वीरें प्रसारित करने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और वॉट्सऐप खातों का भी पता लगाएगी।
वॉट्सऐप चैट और डिजिटल सबूत खंगालेगी EOU
इस जांच में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। EOU मोबाइल फोन, वॉट्सऐप बातचीत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जीपीएस से संबंधित टाइमस्टैम्प की जांच करेगी। जांचकर्ता यह स्थापित करने का प्रयास करेंगे कि प्रश्नपत्र की तस्वीरें कब खींची गईं, उन्हें किस उपकरण से कैप्चर किया गया, किसे प्राप्त हुईं और कितनी जल्दी प्रसारित की गईं। गया मामले में ‘XYZ’ नामक एक कथित वॉट्सऐप ग्रुप भी सामने आया है। जांचकर्ता इसके सदस्यों की पहचान करेंगे और यह निर्धारित करेंगे कि क्या इस ग्रुप का उपयोग परीक्षा के प्रश्नपत्रों को कथित सॉल्वर तक पहुंचाने के लिए किया गया था।
पूर्णिया और गया में कैसे सामने आया था मामला?
पूर्णिया मामला: पूर्णिया में सरकारी कन्या उच्च विद्यालय में तैनात इनविजिलेटर मृत्युंजय कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अनुपस्थित उम्मीदवारों के प्रश्नपत्र एक स्टोररूम में ले जाकर उनकी तस्वीरें खींचीं। इन तस्वीरों को कथित तौर पर वॉट्सऐप के जरिए अपने चचेरे भाई पप्पू कुमार (निवासी, मानसी, खगड़िया) को भेजा गया था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या पप्पू कुमार ने बाद में प्रश्नपत्र एक कथित सॉल्वर नेटवर्क को भेजा था। पप्पू कुमार फरार हैं और उनके खिलाफ अदालत का नोटिस जारी किया गया है।
गया मामला: गया में दारोगा भर्ती परीक्षा के दौरान एक अन्य कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने परीक्षा केंद्र के पास एक मंदिर के पास नालंदा निवासी आशुतोष को गिरफ्तार किया था। उसके पास से एक वॉकी-टॉकी, ब्लूटूथ डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कथित तौर पर बरामद किए गए थे। जांच में चांदी के प्रमोद और आरा के दीपक का भी नाम सामने आया है, जो फिलहाल फरार हैं। पुलिस ने एक कथित 11 सदस्यीय वॉट्सऐप ग्रुप के बारे में भी जानकारी जुटाई है, जिसका उपयोग कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नों को हल करने में मदद करने के लिए किया जा रहा था। EOU इस ग्रुप के डिजिटल इतिहास की जांच करेगी और इसके सदस्यों की पहचान करेगी।
अभ्यर्थी ने कथित तौर पर दिए थे डिजिटल उपकरण: गया मामले में मुकेश नामक पटना निवासी एक अभ्यर्थी का नाम भी सामने आया है। पुलिस जांच के अनुसार, मुकेश ने कथित तौर पर आशुतोष को तीन डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए थे। अर्जुन को कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर देने में शामिल एक सॉल्वर के रूप में पहचाना गया है। दीपक, प्रमोद, मुकेश, अमन और अर्जुन सहित कई व्यक्तियों को इस जांच के संबंध में नामजद किया गया है, जिनमें से कुछ कथित तौर पर फरार हैं।
परीक्षा और विवाद की पूरी टाइमलाइन
- 27 मई को हुई थी परीक्षा: बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने 27 मई को 1,799 सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती के लिए मुख्य परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के दौरान, पूर्णिया में प्रश्नपत्रों की तस्वीरें लिए जाने के आरोप सामने आए थे।
- सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल: प्रश्नपत्र, प्रश्नपुस्तिका और खाली ओएमआर शीट की तस्वीरें बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित हुईं। उम्मीदवारों ने कथित अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त की और परीक्षा रद्द करने की मांग की।
- पटना हाईकोर्ट पहुंचा मामला: यह मामला पटना उच्च न्यायालय भी पहुंचा, जहां राज्य सरकार और आयोग को उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने को कहा गया।
- परिणाम घोषित, शारीरिक परीक्षा स्थगित: विवाद के बावजूद, BPSSC ने 19 जून को 10,759 उम्मीदवारों के परिणाम घोषित किए। अगला चरण शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) निर्धारित था। हालांकि, पेपर लीक के आरोपों और चल रही कानूनी कार्यवाही के बीच, गृह विभाग के निर्देशों के बाद BPSSC ने अगले आदेश तक शारीरिक परीक्षा स्थगित कर दी।
अब जब EOU पूर्णिया और गया के मामलों की एक साथ जांच कर रही है, तो मुख्य सवाल यह है कि क्या जांचकर्ता दोनों कथित घटनाओं के बीच कोई डिजिटल या ऑपरेशनल लिंक स्थापित कर पाएंगे और यह निर्धारित कर पाएंगे कि क्या वे किसी व्यापक परीक्षा-संबंधी नेटवर्क का हिस्सा थीं। इस जांच से परीक्षा की शुचिता को लेकर कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।







