Bihar Pension Protest: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग को लेकर बिहार के सरकारी कर्मचारियों ने एक अनोखा विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। कुशेश्वरस्थान पूर्वी अंचल कार्यालय में कर्मचारियों ने ‘पेंशन नहीं तो सुरक्षा नहीं’ के नारे के साथ सरकार पर दबाव बनाने का नया तरीका अपनाया। यह बिहार पेंशन प्रोटेस्ट अब धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है।
कुशेश्वरस्थान में कर्मचारियों का ‘साइलेंट’ विरोध: काला बिल्ला लगाकर मांगा बुढ़ापे का सहारा, सरकार पर बढ़ा दबाव!
Bihar Old Pension Scheme: बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी अंचल कार्यालय में मंगलवार को सरकारी कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली के लिए अनोखा विरोध प्रदर्शन किया. ‘पेंशन नहीं तो सुरक्षा नहीं’ के नारे के साथ, कर्मचारियों ने अपने बाजू पर काला बिल्ला लगाकर भी नियमित रूप से काम किया. बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर इसे ‘संकल्प दिवस’ के रूप में मनाया गया, जहां कर्मचारियों ने सरकार से अपने भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की.
अनोखा विरोध: काला बिल्ला लगाकर किया काम
सुबह कार्यालय पहुंचते ही कर्मचारियों ने अपने बाजू पर काला बिल्ला बांधा, लेकिन इसके बाद वे अपनी-अपनी मेजों पर बैठकर सामान्य रूप से फाइलों का निपटारा करते रहे. इस दौरान न कोई नारेबाजी हुई और न ही किसी तरह का हंगामा. काम करते हुए विरोध का यह तरीका कर्मचारियों की एकजुटता और उनकी मांग के प्रति गंभीरता को दर्शाता है. उनका कहना है कि यह तब तक जारी रहेगा जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं हो जाती.
क्यों पुरानी पेंशन ही कर्मचारियों की ‘बुढ़ापे की लाठी’?
कर्मचारियों का तर्क है कि नई पेंशन योजना (एनपीएस), जिसे वे ‘एपीएल’ कहते हैं, पूरी तरह से शेयर बाजार पर आधारित है, जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी तरह की गारंटी नहीं है. प्रधान लिपिक मनोज दत्त, प्रेम लाल, जयशंकर कुमार दीपक, श्याम बिहारी मिश्रा और सुबोध कुमार ने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन योजना में सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता था, जो बुढ़ापे का एकमात्र सहारा था. यह गारंटीशुदा आय कर्मचारियों को भविष्य की चिंता से मुक्त रखती थी.
कर्मचारियों ने कहा, ‘एपीएल शेयर बाजार पर टिका है, इसमें रिटायरमेंट के बाद कोई गारंटी नहीं. जबकि ओपीएस में अंतिम वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता था, जो बुढ़ापे का सहारा था.’
सरकार से सीधी अपील: भविष्य की चिंता करे
अंचल कार्यालय के कर्मचारियों ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि अगर वह कर्मचारियों से काम लेती है, तो उन्हें उनके भविष्य की भी चिंता करनी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक पुरानी पेंशन योजना बहाल नहीं हो जाती, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा. यह प्रदर्शन राज्यव्यापी मांग का हिस्सा है, जिसमें सरकारी कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं.
यह ‘संकल्प दिवस’ पूरे बिहार में पुरानी पेंशन बहाली के लिए चल रहे बड़े आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी इस जायज मांग पर जल्द ही ध्यान देगी और उनके भविष्य को सुरक्षित करेगी.
अनोखा विरोध: काम करते रहे, काला बिल्ला भी लगाया
बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर मंगलवार को ‘संकल्प दिवस’ के रूप में मनाया गया। सुबह कार्यालय पहुंचते ही कर्मचारियों ने अपनी बाजू पर काला बिल्ला लगा लिया। इसके बाद वे अपनी-अपनी मेजों पर बैठकर नियमित फाइलों का निपटारा करते रहे। इस दौरान न तो कोई नारेबाजी हुई और न ही किसी तरह का हंगामा। काम करते हुए विरोध का यह तरीका बेहद अनोखा रहा, जिसने बिना किसी व्यवधान के अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की।
क्यों जरूरी है पुरानी पेंशन? कर्मचारियों ने गिनाए फायदे
कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन योजना (NPS) पूरी तरह से शेयर बाजार पर निर्भर है, जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य की कोई गारंटी नहीं है। इसके विपरीत, पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों को अंतिम वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता था, जो बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा था। प्रधान लिपिक मनोज दत्त, प्रेम लाल, जयशंकर कुमार दीपक, श्याम बिहारी मिश्रा और सुबोध कुमार जैसे कर्मचारियों ने अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को अपने कर्मचारियों से काम लेने के साथ-साथ उनके भविष्य की सुरक्षा की भी चिंता करनी चाहिए।
‘पेंशन नहीं तो सुरक्षा नहीं’
आंदोलन जारी रखने का संकल्प
कर्मचारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जब तक पुरानी पेंशन योजना बहाल नहीं हो जाती, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। यह विरोध प्रदर्शन केवल एक दिन का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक दृढ़ संकल्प है।
इस अनोखे बिहार पेंशन प्रोटेस्ट के माध्यम से कर्मचारी सरकार का ध्यान अपनी महत्वपूर्ण मांग की ओर खींचना चाहते हैं। अब देखना यह है कि सरकार कब तक इस पर संज्ञान लेती है और कर्मचारियों के भविष्य की चिंता को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है।







