Bihar Court: दरभंगा में गंभीर अपराधों के आरोपियों को अदालत से कोई राहत नहीं मिल रही है। यहां की अदालतों ने हत्या, अपहरण और जानलेवा हमले जैसे संगीन मामलों में कुल 13 अभियुक्तों की जमानत अर्जियां खारिज कर दी हैं। यह फैसला न्यायपालिका की कठोरता और अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है, जिससे समाज में एक कड़ा संदेश गया है।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने अकेले दो बड़े मामलों में 10 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं रद्द कर दीं। इनमें एक विवाहित महिला की हत्या का सनसनीखेज मामला भी शामिल है।
विवाहिता की हत्या: पांच आरोपियों को नहीं मिली राहत
बहेड़ी थानाकांड संख्या 470/26 से जुड़े एक मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने पांच अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने अदालत को बताया कि ये आरोपी एक विवाहित महिला के साथ अवैध संबंध बनाने के बाद, उसके इनकार करने पर हथौड़ा और लोहे की रॉड से हत्या कर शव को पेड़ से लटकाने के दोषी हैं। इस जघन्य अपराध में सोनकी थानाक्षेत्र के मेकना गांव निवासी रामकुमार साह, दयानंद साह, भोतवा साह, बबीता देवी और संपत कुमारी को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है।
नाबालिग के अपहरण मामले में भी जमानत खारिज
इसी न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने बहेड़ी थानाकांड संख्या 490/25 के तहत दर्ज नाबालिग के अपहरण से जुड़े एक अन्य मामले में भी सख्त रुख अपनाया। इस केस में आरोपी पंकज कुमार यादव, राघव कुमार यादव, सिकन्दर यादव, अमर कुमार यादव और दीपक कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका भी रद्द कर दी गई है। अदालत ने ऐसे गंभीर मामलों में अभियुक्तों को जमानत देने से इनकार कर यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
जानलेवा हमला: तीन अभियुक्तों की याचिका नामंजूर
उधर, अपर सत्र न्यायाधीश आदिदेव की अदालत ने प्राणलेवा हमला (एपीएम थानाकांड संख्या 124/26) से संबंधित मामले में भी आरोपियों को झटका दिया। ब्रह्मोत्तरा निवासी नथूनी यादव, जो 5 अगस्त 2026 से काराधीन है, उसकी नियमित जमानत आवेदन को अदालत ने खारिज कर दिया। इसके अतिरिक्त, इसी मामले में सह-आरोपी लालू यादव और राम जतन यादव की अग्रिम जमानत याचिका को भी न्यायाधीश आदिदेव ने नामंजूर कर दिया।
इन फैसलों से यह साफ है कि Bihar की न्यायपालिका गंभीर अपराधों के प्रति बेहद गंभीर है। अदालतें ऐसे मामलों में आरोपियों को किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय और अपराधियों को उनके कृत्यों की सजा मिल सके। इन लगातार खारिज हो रही जमानत याचिकाओं से आपराधिक तत्वों में भय का माहौल बना है और कानून के शासन पर जनता का विश्वास मजबूत हुआ है।







