Bihar Scientist: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में बिहार के एक वैज्ञानिक ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। दरभंगा जिले के रेवढ़ा गांव निवासी इम्तियाज अहमद ने हाल ही में EOS-05 मिशन के सफल प्रक्षेपण में प्रोजेक्ट डायरेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे पूरे मिथिलांचल का गौरव बढ़ा है।
बचपन से ISRO तक का सफर: वैज्ञानिक इम्तियाज अहमद की कहानी
इम्तियाज अहमद के पिता मोहम्मद कमर आलम एक सेवानिवृत्त सैनिक हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रेवढ़ा के ही मिडिल स्कूल से हुई थी। इसके बाद, उन्होंने दरभंगा जिला स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की और पटना साइंस कॉलेज से आई.एससी की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने बीआईटी सिंदरी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
वर्ष 1998 में इम्तियाज अहमद ने ISRO में अपने करियर की शुरुआत की थी। वे INSAT-3DS मिशन में सैटेलाइट/प्रोजेक्ट डायरेक्टर जैसी अहम जिम्मेदारी पहले भी संभाल चुके हैं। उपलब्ध पूर्व छात्र रिकॉर्ड के अनुसार, GSAT-20 और GISAT-2 जैसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों से भी वे प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर जुड़े रहे हैं।
EOS-05 मिशन: बिहार के लिए गौरव का क्षण
चार सितंबर को EOS-05 मिशन का सफल प्रक्षेपण उनके अंतरिक्ष अनुसंधान करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है। इस मिशन में प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका निभाना उनकी विशेषज्ञता और समर्पण को दर्शाता है। रेवढ़ा जैसे छोटे गांव से निकलकर अंतरिक्ष विज्ञान के शिखर तक पहुंचना न केवल दरभंगा, बल्कि पूरे बिहार के लिए प्रेरणादायक है।
इम्तियाज अहमद का यह सफर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि कड़ी मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, और वे अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा से देश का मान बढ़ा रहे हैं।







