Bihar Panchayat Election: बिहार में आगामी पंचायत चुनावों से पहले स्थानीय स्वशासन की तस्वीर बदलने वाली है। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के करीब है, और इसी बीच पंचायतों की सीमाएं नए सिरे से तय करने की कवायद तेज हो गई है। प्रशासन ने अब हर गांव और टोले की डिजिटल लोकेशन दर्ज करने का अभियान शुरू किया है, जिससे भविष्य में आपकी पंचायत का नक्शा पूरी तरह बदल सकता है।
10 सितंबर तक पूरी होगी GPS मैपिंग, ऐसे दर्ज हो रही लोकेशन
पंचायतों की सीमा निर्धारण के काम को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने डिजिटल मैपिंग शुरू की है। गांव-टोलों की भौगोलिक स्थिति को मोबाइल ऐप के जरिए रिकॉर्ड किया जा रहा है। फील्ड में तैनात कर्मचारियों को संबंधित गांव या टोले में पहुंचकर अपने मोबाइल का GPS चालू करना होगा। इसके बाद, उस जगह की अक्षांश और देशांतर, यानी सटीक लोकेशन ऐप पर दर्ज की जाएगी। इस महत्वपूर्ण कार्य को 10 सितंबर तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
आपकी पंचायत की सीमा क्यों बदल रही है? ये है पूरा गणित
पंचायत सीमाओं को तय करने की शुरुआती तैयारी 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर हुई थी। इसके साथ ही, 1991 की जनगणना के आंकड़ों का भी गहनता से अध्ययन किया गया। दोनों वर्षों की जनसंख्या के अनुपात की तुलना करने के बाद, अब गांवों में जाकर डिजिटल मैपिंग के जरिए उनकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति की जांच की जा रही है। इस दौरान, एक गांव से दूसरे गांव तक आवागमन की सुविधा, नाला, नहर, पइन और अन्य रास्तों के साथ-साथ भौगोलिक परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी भी इकट्ठा की जा रही है।
हर गांव या टोले के लिए कुल 9 विशिष्ट स्थानों की लोकेशन दर्ज होगी। इनमें उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम दिशाओं के साथ-साथ बीच का हिस्सा भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम के चारों कोनों की भी मैपिंग की जा रही है। यह प्रक्रिया गांव और टोले का एक व्यापक डिजिटल भौगोलिक रिकॉर्ड तैयार करेगी।
यह डिजिटल रिकॉर्ड पंचायत की सीमा तय करते समय प्रशासन के लिए बहुत सहायक होगा। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि किस गांव को किस पंचायत में शामिल करना वहां के निवासियों के लिए अधिक सुविधाजनक रहेगा।
कौन कर रहा है यह काम? जानें मैपिंग में जुटे कर्मचारी
इस महत्वपूर्ण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए प्रखंड स्तर पर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है। कार्यपालक सहायक, पंचायत सचिव और आवास सहायकों को फील्ड में लगाया गया है। ये कर्मचारी न केवल गांवों और टोलों की सही लोकेशन दर्ज कर रहे हैं, बल्कि पंचायतों की सीमा तय करने के लिए आवश्यक भौगोलिक जानकारी भी जुटा रहे हैं। आने वाले समय में यह कवायद बिहार की ग्रामीण प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव लाएगी।







