Bihar Makhana Farming: बिहार के किसानों के लिए मखाना अब सिर्फ पारंपरिक जलक्षेत्रों की फसल नहीं रह गया है। यह अब उनकी आय का एक नया और मजबूत जरिया बन रहा है। दरभंगा के कृषि विज्ञान केंद्र, जाले में आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम ने इस बदलाव की नींव रखी है, जहां 50 किसानों ने मखाना उत्पादन और उसके प्रसंस्करण की वैज्ञानिक बारीकियां सीखीं। इस पहल से न केवल किसानों की कमाई बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
खेतों में मखाना उत्पादन: कमाई का नया तरीका
कृषि विज्ञान केंद्र, जाले में आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने की। इसमें राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के डॉ. मनोज कुमार और डॉ. धर्मेन्द्र कुमार विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक तकनीक, लगातार बढ़ती बाजार मांग और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण मखाना एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि रोस्टेड, फ्लेवर्ड मखाना, पाउडर, स्नैक और अन्य खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग ने इसके बाजार का विस्तार किया है।
केंद्राध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने किसानों को खेत आधारित मखाना उत्पादन की तकनीक समझाई। उन्होंने विस्तार से बताया कि पानी रोकने की क्षमता वाली समतल भूमि, मजबूत मेड़ और उचित सिंचाई-जल निकासी व्यवस्था खेत में मखाना उगाने के लिए आवश्यक हैं। इस विधि से जलस्तर, पौधों की स्थिति और फसल प्रबंधन को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है, जिससे बिहार में मखाना की खेती का नया अध्याय शुरू हो रहा है।
प्रसंस्करण से बढ़ेगा मुनाफा, खुलेंगे रोजगार के द्वार
डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने मखाना प्रसंस्करण की विभिन्न अवस्थाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बीज संग्रहण के बाद सफाई, सुखाने, ग्रेडिंग, भूनने, फोड़ने, छंटाई और पैकेजिंग की प्रक्रिया से मखाना बाजार तक पहुंचता है। आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से श्रम कम होता है और उत्पादों की गुणवत्ता में भी एकरूपता आती है। उन्होंने मखाना से बनने वाले मूल्यवर्धित उत्पादों जैसे रोस्टेड, मसाला, पेरी-पेरी, हर्बल फ्लेवर, पाउडर, लड्डू, मिठाई और हेल्थ स्नैक बनाने की अपार संभावनाएँ बताईं। डॉ. कुमार ने खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, उचित पैकेजिंग, लेबलिंग और गुणवत्ता नियंत्रण को भी बेहद जरूरी बताया।
मखाना की पूरी वैल्यू चेन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है। महिला स्वयं सहायता समूह सफाई, ग्रेडिंग, रोस्टिंग, फ्लेवरिंग और पैकेजिंग से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। वहीं ग्रामीण युवा मिनी प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग यूनिट और स्थानीय ब्रांड के माध्यम से अपना उद्यम शुरू कर सकते हैं। — डॉ. पूजा कुमारी, कार्यक्रम संचालिका
कार्यक्रम की संचालिका डॉ. पूजा कुमारी ने जोर देकर कहा कि मखाना की पूरी वैल्यू चेन ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूह सफाई, ग्रेडिंग, रोस्टिंग, फ्लेवरिंग और पैकेजिंग जैसे कार्यों से जुड़कर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। इसके अलावा, ग्रामीण युवा मिनी प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग यूनिट और स्थानीय ब्रांड विकसित करके नए उद्यम शुरू कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में कृषि अभियांत्रिकी वैज्ञानिक ई. निधि कुमारी, पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक राणा और फार्म मैनेजर डॉ. चंदन कुमार समेत केंद्र के अन्य कर्मी भी मौजूद थे। यह प्रशिक्षण दरभंगा के किसानों के लिए एक नई दिशा प्रदान कर रहा है।








You must be logged in to post a comment.