Bihar Saharsa Airport: बिहार के सहरसा में हवाई सेवा का दशकों पुराना सपना अब हकीकत बनने की राह पर है। कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए बहुप्रतीक्षित सहरसा एयरपोर्ट के विकास और उन्नयन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने 42.52 करोड़ रुपये की निविदा जारी कर दी है। इस महत्वपूर्ण जानकारी को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किया, जिससे पूरे कोसी क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस परियोजना को 450 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जो इस क्षेत्र के लिए एक नई सुबह का संकेत है।
हालांकि, एयरपोर्ट का निर्माण पूरा होने के बाद विमान सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक नियामकीय प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी। इस कदम से न केवल हवाई कनेक्टिविटी में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
रनवे ही नहीं, पूरा एयरपोर्ट होगा अपग्रेड: जानिए क्या-क्या बनेगा?
सहरसा एयरपोर्ट के विकास की योजना सिर्फ रनवे को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है। इस व्यापक परियोजना में एयरपोर्ट की कई प्रमुख सुविधाओं का निर्माण और आधुनिकीकरण शामिल है। निविदा के तहत, रनवे, टैक्सी-वे और एप्रन को नए सिरे से विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही, परिधीय सड़क, जीएसई एरिया, वाहन मार्ग और इमरजेंसी एक्सेस रोड जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर भी काम होगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स हैंडल पर इसकी जानकारी साझा की है। निविदा जारी होने के साथ ही सहरसा और पूरे कोसी क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी की उम्मीद एक बार फिर मजबूत हुई है।
रनवे एंड सेफ्टी एरिया और रनवे बेसिक स्ट्रिप को भी उन्नत किया जाएगा। इन सभी सुविधाओं का मुख्य उद्देश्य एयरपोर्ट को कोड-2बी श्रेणी के छोटे क्षेत्रीय विमानों के सुरक्षित और सुचारु परिचालन के लिए आवश्यक मानकों के अनुरूप तैयार करना है। यह बदलाव कोसी क्षेत्र के निवासियों को हवाई यात्रा का एक सुविधाजनक विकल्प प्रदान करेगा, जिससे उन्हें अब दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
12 एकड़ जमीन पर 147 करोड़ का खर्च, कोड-2बी श्रेणी के लिए होगा तैयार
सहरसा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण एक महत्वपूर्ण चुनौती थी, जिसे राज्य सरकार ने अपने हाथ में लिया है। प्रस्तावित रनवे के विस्तार के लिए अतिरिक्त 12 एकड़ जमीन की आवश्यकता है, जिसके अधिग्रहण पर राज्य सरकार लगभग 147 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
इस जमीन अधिग्रहण का पूरा खर्च बिहार सरकार वहन करेगी। अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद, यह जमीन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे एयरपोर्ट के विकास कार्य के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। यह स्पष्ट है कि एयरपोर्ट के विकास पर होने वाला कुल खर्च केवल 42.52 करोड़ रुपये की निर्माण निविदा तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन अधिग्रहण में भी राज्य सरकार एक बड़ी राशि का निवेश कर रही है।
450 दिनों में काम पूरा करने की चुनौती, कोसी के लिए बदलेगी तस्वीर
एएआई द्वारा जारी निविदा में निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 450 दिनों की स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। अब निर्माण एजेंसी का चयन और उसके बाद कार्य शुरू होने पर, इस समय-सीमा के भीतर परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करना होगा। प्रशासनिक स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती तय समय में जमीन उपलब्ध कराने और निर्माण कार्य को सुरक्षा व तकनीकी मानकों के अनुरूप पूरा कराने की होगी।
सहरसा एयरपोर्ट का विकास केवल यात्रियों के लिए हवाई सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। हवाई सेवा शुरू होने से व्यापारियों, कारोबारियों, नौकरीपेशा लोगों और दूसरे शहरों में पढ़ने वाले छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। पर्यटन के लिहाज से भी सहरसा और आसपास के क्षेत्रों की पहुंच बढ़ेगी, जिससे बाहर से आने वाले निवेशकों और कारोबारियों के लिए यात्रा आसान होगी। स्थानीय स्तर पर इसका प्रभाव परिवहन, होटल, रेस्तरां और अन्य सेवा क्षेत्रों के कारोबार पर भी दिखेगा, जिससे लंबे समय में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
वर्षों के इंतजार के बाद अब आगे क्या?
सहरसा में एयरपोर्ट की चर्चा कई वर्षों से चल रही थी, और स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल हमेशा यही रहा है कि हवाई सेवा आखिर कब शुरू होगी। अब 42.52 करोड़ रुपये की निविदा जारी होने और जमीन अधिग्रहण में राज्य सरकार द्वारा बड़ी राशि खर्च किए जाने के बाद, यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ती दिख रही है। अगला महत्वपूर्ण चरण निर्माण एजेंसी का चयन और समय पर जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा। इसके बाद, निर्धारित 450 दिनों में निर्माण कार्य पूरा करना होगा। परियोजना के पूरा होने के बाद, विमान संचालन से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां और नियामक प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी। यदि यह पूरी प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो सहरसा एयरपोर्ट निश्चित रूप से कोसी क्षेत्र की कनेक्टिविटी का एक नया केंद्र बन सकता है, जिससे सहरसा और आसपास के जिलों के लोगों को तेज और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलेगा।







