Lalu Prasad Scam: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी टेंडर घोटाला मामले में लालू परिवार और चार अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश जारी किया है। इस अदालती फैसले के बाद बिहार के सियासी गलियारों में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सभी आरोपियों को 3 अक्टूबर को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश होना होगा।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता मृत्युंजय तिवारी ने अदालत के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘कोर्ट ने जो ऑब्जर्व किया उसके अनुसार फैसला सुनाया। इससे किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।’ यह मामला बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट ले आया है।

कोर्ट ने क्या कहा और किसे मिली राहत?
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सात लोगों के खिलाफ ‘पुख्ता संदेह’ है। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ‘जांच का स्वरूप, समय और तरीका ऐसा नहीं लगता कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित हो, जैसा कि आरोपियों के वकीलों ने दलील दी है।’ अदालत ने इस मामले में नौ आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें मुक्त भी किया है, जबकि अन्य को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
लालू प्रसाद पर क्या हैं मुख्य आरोप?
सीबीआई की प्राथमिकी में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद ने वर्ष 2004 में आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव का काम एक निजी कंपनी को सौंप दिया था। इस सौदे के बदले में, उन्हें पटना में एक बेशकीमती जमीन रिश्वत के तौर पर मिली। यह जमीन पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की एक बेनामी कंपनी के जरिए प्राप्त की गई थी। सीबीआई की इसी प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा, ‘मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सात लोगों के खिलाफ पुख्ता संदेह है। जांच का स्वरूप, समय और तरीका ऐसा नहीं लगता कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित हो, जैसा कि आरोपियों के वकीलों ने दलील दी है।’
IRCTC टेंडर घोटाला: पूरा मामला क्या है?
यह पूरा मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रांची और पुरी में स्थित आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव का ठेका निजी कंपनी सुजाता होटल्स को नियमों को ताक पर रखकर दिया। इसके बदले में, आरोप है कि सुजाता होटल्स के मालिकों ने बेनामी तरीके से दिल्ली में लालू परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति हस्तांतरित की। ठेका देते समय नियमों का पालन नहीं किया गया, जैसे कि होटलों के रखरखाव के लिए कोई खुली बोली नहीं बुलाई गई और न ही आवश्यक क्लीयरेंस ली गई। यह सब कथित तौर पर लालू यादव के प्रभाव में हुआ।
कैसे सामने आया मामला और आगे क्या होगा?
यह घोटाला तब सार्वजनिक हुआ जब सीबीआई ने वर्ष 2017 में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव सहित कई लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया। सीबीआई का आरोप है कि इस सौदे में रिश्वत के तौर पर संपत्ति का बड़ा लेन-देन हुआ। इसके बाद, इस मामले की जांच की जिम्मेदारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपी गई। अब 3 अक्टूबर को लालू परिवार को कोर्ट में पेश होना होगा, जिससे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तेज होने की उम्मीद है।







