Bihar Police Salary: बिहार में पुलिस उपनिरीक्षकों के वेतनमान में बढ़ोतरी की मांग को लेकर शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक बड़ा डिजिटल अभियान चलाया गया। राज्यभर के पुलिस अभ्यर्थियों और उनके समर्थकों ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक संगठित होकर पोस्ट किए। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य दारोगा पद को पे लेवल 7 के दायरे में लाना है, क्योंकि मौजूदा समय में उन्हें पे लेवल 6 का वेतन मिल रहा है। इस अभियान के माध्यम से गृह विभाग और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सीधी अपील की गई है, जिसमें हजारों ऑनलाइन संदेशों के जरिए पद के जोखिम और कार्यभार का हवाला दिया गया।
क्यों उठ रही है बिहार पुलिस सब-इंस्पेक्टर के वेतनमान बढ़ाने की मांग?
पुलिस महकमे में दारोगा पद को जांच और कानून-व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण धुरी माना जाता है। किसी भी आपराधिक घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर अदालत में चार्जशीट दाखिल करने तक की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर की होती है। हत्या, लूट, डकैती और साइबर अपराध जैसे गंभीर मामलों में अनुसंधान अधिकारी की भूमिका दारोगा ही निभाते हैं। फील्ड ड्यूटी के दौरान अपराधियों की गिरफ्तारी और छापेमारी में उनकी जान को सीधा जोखिम रहता है। चौबीसों घंटे की अनिश्चित ड्यूटी के कारण इन पुलिसकर्मियों को अत्यधिक शारीरिक और मानसिक दबाव से गुजरना पड़ता है।

काम के अनुरूप वित्तीय सुरक्षा और सम्मानजनक वेतनमान की जरूरत
डिजिटल मंच पर साझा किए गए संदेशों में वेतन विसंगति और कार्य की प्रकृति का तुलनात्मक विवरण दिया गया। समर्थकों का तर्क है कि अन्य समकक्ष प्रशासनिक सेवाओं की तुलना में दारोगा के काम के घंटे तय नहीं होते। विधि-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ वीआईपी सुरक्षा और त्योहारों पर लगातार गश्त की ड्यूटी भी उनकी ही होती है। इतनी भारी जिम्मेदारियों के बावजूद, वर्तमान में दारोगा संवर्ग को पे लेवल 6 का वेतन मिल रहा है। अभियान में यह मांग उठाई गई है कि कार्य की जटिलता और उत्तरदायित्व को देखते हुए इसे तत्काल प्रभाव से पे लेवल 7 किया जाना चाहिए।
इस अभियान के दौरान विभिन्न पुलिस और छात्र समूहों ने एकजुट होकर ऑनलाइन पोस्ट साझा किए। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि सेवा का सम्मान केवल वर्दी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि काम के अनुरूप वित्तीय सुरक्षा और सम्मानजनक वेतनमान मिलना समय की मांग है। पूरे अभियान के दौरान अनुशासन बनाए रखने और केवल निर्धारित हैशटैग का इस्तेमाल करने पर बल दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप दोपहर तक यह मुद्दा राज्य के सोशल मीडिया ट्रेंड्स में शीर्ष पर रहा। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह इस महत्वपूर्ण मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।








