Prashant Kishor: प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर तीखे तेवर दिखाए हैं। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने सहरसा में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘बेचारा’ वाले बयान पर करारा पलटवार किया। उन्होंने सम्राट चौधरी को ‘अनपढ़ और आपराधिक छवि’ वाला बताया और कोसी क्षेत्र की बाढ़ तथा शराबबंदी कानून को लेकर भी सरकार पर जमकर हमला बोला।
‘अनपढ़ और आपराधिक छवि’ वाले नहीं चला सकते बिहार
प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उन्हें ‘बेचारा’ कहा गया था। किशोर ने कहा कि वह बिल्कुल बेचारे हैं, क्योंकि उनके पास बिहार छोड़कर जाने का कोई और विकल्प नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि बिहार को सुधारने के संकल्प के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है।


किशोर ने स्पष्ट किया कि वह सम्राट चौधरी जैसे ‘अनपढ़ और आपराधिक छवि’ के लोगों के हाथों में बिहार का भविष्य सौंपकर कहीं नहीं जा सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस नजरिए से वह पूरी तरह बेचारे हैं।
कोसी की बाढ़ पर प्रशांत किशोर का सरकार पर बड़ा हमला
प्रशांत किशोर ने कोसी क्षेत्र की बाढ़ की समस्या पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ का दर्द वही समझ सकता है, जिसने कोसी के गांवों में पैदल चलकर लोगों के साथ रातें बिताई हों। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के कई परिवार साल में दो-तीन बार अपना घर बदलने को मजबूर होते हैं, और यह समस्या करीब 80 वर्षों से बनी हुई है।
किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सम्राट चौधरी से सवाल किया कि यदि वे 20 वर्षों से सत्ता में हैं, तो कोसी की जनता को इस 80 साल पुरानी बाढ़ की त्रासदी से कब मुक्ति मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ अब सत्ताधारी लोगों के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया बन गई है।
बांध निर्माण से लेकर राहत कार्य तक में भ्रष्टाचार का आरोप
प्रशांत किशोर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बांध निर्माण, बांध टूटने, बाढ़ राहत और उसके बाद फैलने वाली बीमारियों तक में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता है। उन्होंने दावा किया कि सरकार में बैठे लोग जानबूझकर बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान नहीं चाहते, क्योंकि यह उनके लिए आय का स्रोत बन गई है।
प्रशांत किशोर के इन तीखे बयानों से बिहार की राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। आने वाले समय में देखना होगा कि उनके इन आरोपों पर सरकार और खासकर सम्राट चौधरी की क्या प्रतिक्रिया आती है। यह मुद्दा विधानसभा चुनावों से पहले जनता के बीच एक अहम बहस का विषय बन सकता है।







