Bihar Panchayat Election: बिहार में होने वाले अगले पंचायत चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी पंचायत चुनाव नए सिरे से परिसीमन के बाद ही आयोजित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई रूपरेखा तैयार होगी। पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद-बिहार चैप्टर-5’ के ‘मुखिया संवाद’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट ने यह जानकारी साझा की।
पंचायत चुनाव में परिसीमन की नई व्यवस्था
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार में अगला पंचायत चुनाव पूरी तरह से परिसीमन के बाद ही कराया जाएगा। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पंचायत और नगर निकाय क्षेत्रों की सीमाओं को स्पष्ट करना है, ताकि विकास योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष नगर निकायों में भी परिसीमन की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि करीब साढ़े सात हजार की आबादी पर एक पंचायत का गठन किया जाए, जिससे स्थानीय जरूरतों को और प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सके।
पंचायती राज विभाग में इंजीनियरिंग सेल का गठन
पंचायती राज विभाग में एक इंजीनियरिंग सेल विकसित करने की भी घोषणा की गई है। इस सेल के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहायता मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने ‘ग्राम संसद’ कार्यक्रम में गांवों के
विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला और कहा कि पंचायत स्तर पर विकास की जरूरतों को स्थानीय स्तर से सामने लाना बेहद जरूरी है। इस कार्य में ग्राम संसद को अहम भूमिका निभानी होगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “परिसीमन के बाद पंचायत क्षेत्रों की संरचना को नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा। आबादी और क्षेत्रीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पंचायत गठन की दिशा में काम होगा। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिससे विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने में आसानी हो।”
इंजीनियरिंग सेल के गठन से पंचायतों में बनने वाली सड़कें, नालियां और अन्य विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में तकनीकी मदद मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर योजनाओं की कार्यप्रणाली मजबूत होगी।
बिहार के दीर्घकालिक विकास का लक्ष्य और राजस्व के स्रोत
मुख्यमंत्री ने बिहार के दीर्घकालिक विकास के लक्ष्य को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2037 में बिहार की स्थापना के 125 वर्ष पूरे होंगे और इस अवधि तक राज्य को समृद्ध, सशक्त और विकसित बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार के विकास के लिए भी लंबी अवधि की योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
गांवों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पंचायतों को अपने स्तर पर नए राजस्व स्रोतों की पहचान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने ग्राम संसद से इस संबंध में ठोस सुझाव देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार आम लोगों पर अतिरिक्त कर का बोझ डालने के पक्ष में नहीं है, इसलिए कचरा प्रबंधन, पेयजल, बिजली और सड़क जैसी सुविधाओं के लिए स्थानीय स्तर पर राजस्व के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने के सुझाव मांगे गए हैं।
ग्राम सभा और पंचायत सरकार भवनों का रखरखाव
ग्राम सभा की बैठकों को गांवों की विकास प्रक्रिया से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हर महीने के अंतिम रविवार को ग्राम सभा की बैठक आयोजित करने की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसके तहत साल में कम से कम 12 बार गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव पर भी ध्यान देने की बात कही, ताकि ग्रामीणों को पंचायत स्तर की सेवाएं बेहतर तरीके से मिल सकें। सम्राट चौधरी ने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।








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