Bihar Crime Data बिहार में ‘जंगलराज’ के दावों पर ये क्या बोले आंकड़े? हत्या और डकैती में भारी गिरावट!
Bihar Crime Data: राजनीतिक बयानबाजी के बीच बिहार का क्राइम डेटा नया सच बयां कर रहा है। हत्या और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में भारी गिरावट आई है, लेकिन महिला अपराध और साइबर क्राइम ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
Bihar Crime Data: बिहार की कानून-व्यवस्था पर इन दिनों राजनीतिक गलियारों में जमकर बयानबाजी हो रही है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बीजेपी सांसद शंभू शरण पटेल जैसे नेता राज्य की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। उनका सीधा आरोप है कि अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और पुलिस उनके आगे बेबस है। हालांकि, इन राजनीतिक दावों के उलट, वर्ष 2004 और 2025 के अपराध आंकड़ों की तुलना बिहार की एक अलग तस्वीर पेश करती है।
बिहार में हर साल गुमशुदा होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या 60 फीसदी से अधिक है। बीते साल राज्य में हर दिन औसतन 40 बच्चे गायब हुए। वर्ष 2025 में बच्चों की गुमशुदगी के दर्ज 14,699 मामलों में करीब 8600 जबकि 2026 में जून तक दर्ज 10,577 मामलों में लड़कियों की संख्या लगभग 6700 तक रही है।
हालांकि, मिशन वात्सल्य पोर्टल की निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद इनकी बरामदगी की संख्या बढ़ी है। पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, 2025 में 7772 बच्चे बरामद हुए, जिनमें लड़के 1,205 जबकि लड़कियां 6,567 रहीं। इसी तरह, 2026 में जून तक बरामद 5,232 बच्चों में 868 लड़के एवं 4,364 लड़कियां शामिल रहीं।
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गरीब परिवार की किशोरियों की नौकरी और शादी के नाम पर दूसरे राज्यों में तस्करी से गुमशुदगी की घटनाएं सबसे अधिक हुई हैं। कई मामलों में उनको घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी, जबरन विवाह, यौन शोषण, भिक्षावृत्ति आदि में धकेले जाने की बात भी सामने आयी है।
24 घंटे तक लापता बच्चों के मामले में एफआईआर दर्ज करने की अनिवार्यता से गुमशुदगी के आंकड़े बढ़े हैं। हालांकि, पुलिस पर गोल्डन आवर (शुरुआती समय) के दौरान कार्रवाई नहीं किए जाने के आरोप भी लगते रहे हैं।
”मैं बिहार सरकार से आग्रह करूंगा कि जरूरी है समय रहते हम लोगों को कार्रवाई करने की. मुझे इस बात का दुख होता है मैं एक ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं, जहां पर अपराध बेलगाम हो चुका है. इसपर नियंत्रण पाना जरूरी होगा, नहीं तो बिहार के लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ बहुत बुरे अंजाम तक पहुंचा देगा.”
– चिराग पासवान, केन्द्रीय मंत्री
जुलाई 2025 में एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने कहा था कि उन्हें मौजूदा सरकार को समर्थन देने का दुख होता है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर अपराधियों के सामने झुकने का आरोप लगाया था। इसी तरह, बीजेपी सांसद शंभू शरण पटेल ने भी दावा किया कि अपराधियों में कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है।
अपराधियों में कानून का खौफ खत्म हो गया है।
ये नेताओं के अपने राजनीतिक आरोप हैं, लेकिन जब पुलिस के तुलनात्मक आंकड़ों पर गौर किया जाता है तो अपराध की कहानी कुछ और ही दिखती है। साल 2004 की तुलना में 2025 में कई गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
हत्या और डकैती में ऐतिहासिक गिरावट: क्या बदल रहा बिहार?
2004 में बिहार में हत्या के कुल 3,861 मामले दर्ज हुए थे। यह आंकड़ा 2025 में घटकर 2,556 पर आ गया, जो हत्या के मामलों में लगभग 34 प्रतिशत की बड़ी कमी को दर्शाता है। इसी तरह, डकैती के मामलों में भी भारी गिरावट आई है। 2004 में डकैती के 1,297 मामले सामने आए थे, जबकि 2025 में यह संख्या सिर्फ 174 रह गई। पिछले दो दशकों में दंगों के मामलों में भी करीब 73 फीसदी की कमी देखी गई है और लूट के मामलों में 46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। यह आंकड़े बिहार में पारंपरिक गंभीर अपराधों पर पुलिस की बढ़ती पकड़ की ओर इशारा करते हैं।
महिलाओं के लिए ‘असुरक्षित’ बना बिहार ! NCRB Report के मुताबिक – साल 2023 में: 22,952 मामले। साल 2024 में: 27,359 मामले। यानी लगभग 4,407 मामले बढ़े (करीब 19% की बढ़ोतरी)
महिला अपराध और साइबर क्राइम: नई चुनौतियां
गंभीर अपराधों में कमी के बावजूद, महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं। 2004 में दुष्कर्म के 1,063 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 2,025 हो गए। हालांकि, एक राहत भरी खबर यह है कि 2024 की तुलना में 2025 में रेप के मामलों में 8.2 फीसदी की कमी आई है। अपहरण के मामलों में भी संख्यात्मक वृद्धि दिखती है। 2004 में 2,977 अपहरण के मामले थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7,305 तक पहुंच गया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें फिरौती के लिए अपहरण के सिर्फ 52 मामले थे, जबकि अधिकांश मामले प्रेम प्रसंग या गुमशुदगी की एफआईआर से जुड़े होते हैं।
बिहार पुलिस की बड़ी कार्रवाई और साइबर अपराध का बढ़ता ग्राफ
2025 में बिहार पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। डीजीपी विनय कुमार के मुताबिक, इस दौरान राज्य भर में 3,61,364 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 4,963 अवैध हथियार, 30 हजार से ज्यादा कारतूस और 74 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियां पकड़ी हैं। इस सक्रियता के बावजूद, पारंपरिक अपराधों से हटकर साइबर अपराध एक नई और बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। 2025 में साइबर थानों में 6,319 मामले दर्ज हुए और 1,050 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त, साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर लगभग 28 लाख शिकायतें दर्ज की गईं, जो इस नए खतरे की गंभीरता को दर्शाती हैं।
कुल मिलाकर, 2004 के मुकाबले 2025 में बिहार में हत्या और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में कमी आई है, लेकिन महिला अपराध और साइबर अपराध जैसे नए तरह के अपराध बढ़े हैं। ऐसे में, ‘जंगलराज’ जैसे राजनीतिक दावों को सिर्फ कुछ घटनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि अपराध की सभी श्रेणियों के समग्र आंकड़ों और बदलते स्वरूप के साथ समझने की जरूरत है। यह आंकड़े राज्य की कानून-व्यवस्था की जटिल और बहुआयामी तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
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