Bihar Heritage: दरभंगा में बन रहे एलिवेटेड रोड के कारण शहर के ऐतिहासिक दरभंगा गांधी स्मारक पर खतरा मंडरा रहा है। इस महत्वपूर्ण धरोहर को बचाने के लिए ‘देख रेख एवं रख रखाव कमिटी’ के सदस्यों ने जिला पदाधिकारी कौशल कुमार से मुलाकात की है। जिला पदाधिकारी ने स्मारक को सुरक्षित रखने का पूरा प्रयास करने का आश्वासन दिया, जिससे स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है।
कमिटी के वरीय सदस्य श्याम किशोर प्रधान, रीता सिंह, अशोक नायक, पशुपति महासेठ और रानू सुल्तानिया के शिष्टमंडल ने डीएम कौशल कुमार को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि लहेरियासराय टाबर स्थित यह प्राचीन स्मारक एलिवेटेड सड़क निर्माण के दायरे में आने की संभावना है। शिष्टमंडल ने इस अमूल्य बिहार हेरिटेज को बचाने की पुरजोर मांग की।
स्वतंत्रता सेनानी और प्रख्यात समाजसेवी स्व. अशर्फी महासेठ ने आजादी के बाद 1949-1950 में अपने निजी कोष से ‘टाबर (घड़ी घर) एवं गांधी स्मारक (गांधी प्रतिमा)’ की स्थापना कराई थी।
राष्ट्रीय चेतना और महात्मा गांधी के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए यह स्मारक बनाया गया था, जिस पर निर्माता स्व. अशर्फी महासेठ का नाम भी अंकित है। सदस्य श्याम किशोर प्रधान ने स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक धरोहर ‘टाबर’ और ‘गांधी स्मारक’ को एलिवेटेड सड़क निर्माण के दायरे से बचाना या सुरक्षित स्थान पर पुनर्स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है।
गांधी स्मारक: राष्ट्रीय पर्वों का केंद्र, दरभंगा की पहचान
अशोक नायक ने बताया कि यह ऐतिहासिक गांधी स्मारक स्थापना के बाद से ही अखंड प्रेरणा का स्रोत रहा है। हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती, 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर यह राजकीय और स्थानीय समारोहों का मुख्य केंद्र होता है। यहां दरभंगा के जिला पदाधिकारी, अन्य अधिकारीगण, शहर के गणमान्य लोग और राजनेता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं। यह स्मारक न केवल शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति दरभंगा वासियों की अगाध श्रद्धा और गौरव का प्रतीक भी है।
जिला पदाधिकारी कौशल कुमार ने शिष्टमंडल को आश्वासन दिया, “प्राचीन स्मारक को बचाने का पूरी प्रयास किया जा रहा है।”
तकनीकी समीक्षा और हेरिटेज शिफ्टिंग की मांग
सदस्य रीता सिंह ने सुझाव दिया कि निर्माण कार्य के तकनीकी नक्शे (डिजाइन) की समीक्षा की जाए। इससे यह सुनिश्चित हो सके कि गांधी स्मारक को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सड़क का निर्माण हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तकनीकी कारणों से इसे वर्तमान स्थान से हटाना अनिवार्य हो, तो आधुनिक तकनीकों, जैसे ‘हेरिटेज शिफ्टिंग तकनीक’, का उपयोग करके इसे पूरी गरिमा और सम्मान के साथ किसी नजदीकी सुरक्षित व उपयुक्त स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए। इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की नितांत आवश्यकता है।
स्थानीय जनता की भावनाएं इस स्मारक से गहराई से जुड़ी हैं। ऐसे में, इस प्राचीन धरोहर को पूरी तरह से नष्ट होने से बचाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। जिला प्रशासन के आश्वासन के बाद अब देखना होगा कि एलिवेटेड सड़क निर्माण के दौरान इस ऐतिहासिक स्थल को कैसे सुरक्षित रखा जाता है।








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