Bihar Ganga Path: नए साल में बिहार की सड़क कनेक्टिविटी को एक नई रफ्तार मिलने वाली है। गंगा नदी के किनारे तीन अत्याधुनिक गंगा पथों का निर्माण कार्य नए साल में शुरू होने की पूरी संभावना है, जिससे राज्य के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में आवाजाही आसान होगी। इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए सलाहकार एजेंसियों ने अपना काम शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।
तीन महीने में डीपीआर, फिर शुरू होगा निर्माण
इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की नींव रखी जा चुकी है। चयनित परामर्शियों को अगले तीन महीने के भीतर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया गया है। डीपीआर तैयार होते ही निर्माण कार्य के लिए निविदा जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। बिहार राज्य पथ विकास निगम (बीएसआरडीसीएल) इन परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसका उद्देश्य गंगा तटीय सड़क नेटवर्क को व्यापक बनाना है।
पटना, सारण सहित इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
गंगा किनारे बनने वाले इन तीन नए पथों से राज्य के कई जिलों को सीधा लाभ पहुंचने वाला है। इनमें पटना, सारण, भोजपुर, बक्सर, सीवान और गोपालगंज के साथ-साथ आसपास के अन्य जिले भी शामिल हैं। इन सड़कों के बनने से न केवल आवाजाही सुगम होगी, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इन परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसे राज्य मंत्रिपरिषद ने अप्रैल 2026 में सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। हालांकि, लागत का अंतिम अनुमान डीपीआर और ट्रांजेक्शन एडवाइजर की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
जेपी गंगा पथ की तर्ज पर विकास, अंतरराष्ट्रीय मानकों का होगा पालन
यह परियोजना पटना के जेपी गंगा पथ की सफलता से प्रेरित है, जिसने शहर की आवाजाही और नदी तट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नए पथों के लिए परामर्शी एजेंसियों को अंतिम एलाइनमेंट, ट्रैफिक आकलन, भूमि अधिग्रहण की जरूरत, पर्यावरणीय प्रभाव, तकनीकी डिजाइन और लागत का गहन अध्ययन करने को कहा गया है। सर्वे और डिजाइनिंग का काम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करने का विशेष निर्देश दिया गया है, ताकि ये सड़कें आधुनिक और टिकाऊ बन सकें। फिलहाल परामर्शियों का काम जोरों पर है और राज्य सरकार अगले चरण की तैयारियों में जुटी है।
इन गंगा पथों के निर्माण से पश्चिमी और उत्तरी बिहार में तटीय सड़क नेटवर्क की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। यह न केवल लोगों के लिए यात्रा को सुविधाजनक बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। हालांकि, अंतिम रूट, लागत और निर्माण अवधि डीपीआर के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन उम्मीद है कि यह परियोजना बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।






