Singer Devi: भोजपुरी संगीत उद्योग में बढ़ती अश्लीलता को लेकर Singer Devi ने बेबाक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कंपनियों को केवल फायदा और पैसे कमाने से मतलब है, जिसके चलते अच्छे गानों के बजाय अश्लील सामग्री को ज्यादा बढ़ावा मिलता है। उनके इस बयान से भोजपुरी इंडस्ट्री में एक नई बहस छिड़ गई है।
हालिया बातचीत में सिंगर देवी ने अश्लीलता और कला के बीच का अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि अश्लीलता दिखाना आसान होता है, लेकिन कला का अपना एक अलग और महत्वपूर्ण स्थान है। देवी ने भोजपुरी गानों में लगातार बढ़ती अश्लीलता और इसके कारण कलाकारों की बदलती छवि पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
कंपनियों पर सीधा सवाल: ‘सिर्फ पैसों का खेल’
सिंगर देवी ने सीधे तौर पर संगीत कंपनियों पर उंगली उठाई। उनका मानना है कि जब तक कंपनियां केवल व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता देंगी, तब तक गुणवत्तापूर्ण और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध संगीत को पीछे धकेलकर अश्लील सामग्री को ही बढ़ावा दिया जाएगा। यह स्थिति न केवल दर्शकों की पसंद को प्रभावित करती है, बल्कि भोजपुरी भाषा की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती है।
उन्होंने भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर भी अपनी राय रखी। देवी का मानना है कि इस कदम से भाषा को उचित सम्मान मिलेगा और इसकी सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, जिससे शायद अश्लीलता पर लगाम लगाने में भी मदद मिल सकती है।
सिंगर देवी का सफर और निजी जिंदगी
अपने लंबे संगीतमय सफर के बारे में बताते हुए सिंगर देवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि लोगों ने हमेशा उनकी आवाज को कुछ अलग पाया और पहली बार सुनने पर ही उस पर विशेष ध्यान दिया। यह दर्शकों का प्यार ही है, जिसने उन्हें भोजपुरी संगीत में अपनी पहचान बनाने में मदद की।
निजी जिंदगी और प्यार को लेकर भी देवी ने खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अब वह एक ऐसे साथी की तलाश में हैं, जिसके साथ वह अपना आगे का पूरा जीवन बिता सकें। उनके इस व्यक्तिगत खुलासे ने भी प्रशंसकों का ध्यान खींचा है।
सिंगर देवी के इस बेबाक इंटरव्यू से भोजपुरी संगीत जगत में नए सिरे से मंथन शुरू हो सकता है। उनके बयान, खासकर कंपनियों पर लगाए गए आरोप, इंडस्ट्री को अपनी प्राथमिकताओं पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।






