नेपाल में अचानक बाढ़, बहे 6 पुल; बिहार-यूपी के लिए बड़ी चेतावनी जारी! 10 लोग लापता, 35 घर भी बहे
Bihar Gandak flood: पड़ोसी देश नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा दिया है, जिससे तीन पुल बह गए हैं। भारत सरकार ने बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
Bihar Gandak flood: पड़ोसी देश नेपाल में हुए भूस्खलन के बाद आई अचानक बाढ़ ने बूढ़ी गंडक नदी के आसपास के क्षेत्रों में बड़ा असर दिखाया है। नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके परिणामस्वरूप तीन पुल बह गए। इस घटना के बाद नेपाल के स्थानीय प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे से दूर रहने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाने की अपील की है।
नेपाल में बूढ़ीगंडकी नदी में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ में छह पुल बह गए हैं, जबकि कम से कम 10 लोग लापता बताए जा रहे हैं। गोरखा जिले के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी नेत्रप्रसाद शर्मा के अनुसार, बाढ़ में दो मोटर पुल और चार झूला पुल बह गए हैं।
इधर, भारत सरकार ने बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक नदी से सटे निचले इलाकों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने दोनों राज्यों के संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में एक विशेष एडवाइजरी भेजी है।
बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ का कहर: 6 पुल बहे, कम से कम 10 लोग लापता; 35 घर भी बहे
आरुघाट और धादिंग के त्रिपुरासुंदरी को जोड़ने वाला तथा आरुघाट के सोती और मान्बु को जोड़ने वाला पक्का पुल बाढ़ में बह गया है। इसके अलावा, धार्चे गाउँपालिका के वार्ड नंबर 1 और 3 को जोड़ने वाला बेली ब्रिज भी बह गया है। इसी तरह माछीखोला और केरौंजा को जोड़ने वाला झूला पुल, चुमनुब्री के ठाडो भर्याङ और जगत को जोड़ने वाला पुल तथा सिर्दिबास के घट्टेखोला और फिलिम को जोड़ने वाला झूला पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गए हैं।
नारायणी नदी तंत्र में जलस्तर बढ़ा, भारत में सीमित असर का अनुमान
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, नेपाल में नारायणी नदी तंत्र के ऊपरी हिस्से में अचानक बाढ़ आने से बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। आरूघाट क्षेत्र में पानी के स्तर में अचानक वृद्धि देखी गई। हालांकि, नदी के ऊपरी हिस्सों में स्थित जलस्तर निगरानी केंद्रों से मिले संकेतों के मुताबिक, पहले पानी बढ़ा और फिर उसमें कमी आने लगी। यह दर्शाता है कि बाढ़ का पानी नदी के प्रवाह के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। इसलिए भारत-नेपाल सीमा के पास और गंडक नदी के निचले इलाकों में लगातार निगरानी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मंत्रालय का अनुमान है कि बाढ़ का यह पानी गंडक नदी में आगे बढ़ेगा, लेकिन भारतीय सीमा तक पहुंचते-पहुंचते इसकी तीव्रता काफी कम हो जाने की संभावना है। फिलहाल, भारत में इसका असर बहुत सीमित रहने का अनुमान जताया गया है। यह आकलन जलस्तर संबंधी उपलब्ध संकेतों पर आधारित है, जिसके चलते स्थानीय अधिकारियों को स्थिति पर निरंतर नजर रखने की सलाह दी गई है।
गंडक बैराज पर कड़ी निगरानी, बिहार-यूपी के लिए चेतावनी
गंडक बैराज में भी पानी की आवक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी के मद्देनजर बिहार और उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को पूरी तरह से सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। बैराज में आने वाले पानी की मात्रा, नदी के वर्तमान जलस्तर और निचले क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखना महत्वपूर्ण है। जलस्तर में किसी भी तरह के बदलाव की स्थिति में स्थानीय प्रशासन को तुरंत आवश्यक कदम उठाने होंगे।
नेपाल प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। अचानक आने वाली बाढ़ में जलस्तर बहुत कम समय में बदल सकता है। ऐसे में नदी के किनारे जाना, तेज बहाव वाले हिस्सों को पार करना या पुलों के पास रुकना जोखिम भरा हो सकता है। तीन पुलों के बहने की घटना से नदी में पानी के तेज प्रवाह का संकेत मिलता है।
बिहार में गंडक नदी के आसपास बसे निचले इलाकों के लिए यह स्थिति निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। नदी में पानी बढ़ने की स्थिति में तटवर्ती क्षेत्रों, निचले खेतों और नदी के करीब रहने वाली आबादी पर विशेष ध्यान रखना होगा। उत्तर प्रदेश के गंडक प्रभावित क्षेत्रों में भी इसी तरह की सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
भारत और नेपाल के बीच नदियों का जल प्रवाह आपस में जुड़ा हुआ है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश या भूस्खलन जैसी घटनाएं नीचे की ओर बहने वाली नदियों के जलस्तर को प्रभावित करती हैं। इस बार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की एडवाइजरी में तत्काल किसी बड़े प्रभाव की आशंका के बजाय लगातार निगरानी पर जोर दिया गया है। उपलब्ध संकेतों के अनुसार, भारतीय सीमा तक पहुंचते-पहुंचते बाढ़ की तीव्रता कम हो सकती है, फिर भी गंडक बैराज में पानी की आवक बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहना अनिवार्य है। नदी के जलस्तर में आगे होने वाले बदलाव और स्थानीय निगरानी केंद्रों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर ही स्थिति का अगला आकलन किया जाएगा।
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