Bihar MLC Election: बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ गया है। जेडीयू के मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब व्यक्तिगत हमलों में बदल गया है। दोनों नेताओं की जुबानी जंग ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग पर लगाया बड़ा आरोप: ‘बिहार में करोड़ों बांटे, सत्ताधारी दल को फायदा!’
Bihar Election Commission: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सीतामढ़ी में CJP के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग और उसके अधिकारी सत्तारूढ़ दल को सीधे फायदा पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चर्चा की मांग की, जिसमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से लेकर चुनाव की तारीखें, आदर्श आचार संहिता, मतगणना और चुनाव पर्यवेक्षकों की तैनाती जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। प्रशांत किशोर ने तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ये बातें कहीं।
सरकारी खजाने से पैसे बांटने का आरोप: 1.5 करोड़ लोगों को मिले 10-10 हजार!
प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, मतदान से ठीक दो दिन पहले तक डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों को सरकारी खजाने से 10-10 हजार रुपये दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान होने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार द्वारा चुनाव प्रभावित करने की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। किशोर ने दावा किया कि बिहार में चुनाव के दौरान इस जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं किया गया।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल
प्रशांत किशोर ने राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी खजाने पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, और आम लोगों की समस्याओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल रही है। उन्होंने इस स्थिति के लिए भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का मुद्दा भी उठाया।
प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा, ‘चुनावी निष्पक्षता का आकलन केवल मतदान के दिन की व्यवस्था से नहीं किया जा सकता। इसके लिए मतदान से पहले की तैयारियों और चुनाव के बाद मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया को देखना जरूरी है।’
जन सुराज संस्थापक ने फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया। फॉर्म-6 का उपयोग पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए होता है, जबकि फॉर्म-7 मौजूदा मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराने से संबंधित है। उन्होंने चुनाव कार्यक्रम घोषित करने, आदर्श आचार संहिता लागू कराने, मतगणना की व्यवस्था और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति जैसे विषयों पर भी सवाल उठाए। उनके आरोप के मुताबिक, इन सभी स्तरों पर चुनाव आयोग की भूमिका की विस्तृत जांच होनी चाहिए। प्रशांत किशोर ने CJP के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देते हुए चुनाव आयोग की जवाबदेही को एक प्रमुख मुद्दा बनाया है।
‘जल्दी बेरोजगार होंगे नीरज’, पीके का पलटवार
प्रशांत किशोर ने जेडीयू नेता नीरज कुमार पर करारा पलटवार किया है। उन्होंने सीधे चेतावनी देते हुए कहा, ‘मुझे बुखार लगेगा तो पैरासिटामोल खा लेंगे। नीरज कुमार चिंता न करें। वे डॉक्टर तो हैं नहीं और जल्दी ही बेरोजगार होने वाले हैं।’ पीके ने यह भी दावा किया कि यदि नीरज कुमार अपनी बयानबाजी जारी रखते हैं, तो वह जेडीयू से जुड़े उनके कथित ‘कामों का कच्चा-चिट्ठा’ सार्वजनिक कर देंगे। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में जेडीयू के कुछ नेताओं ने उन्हें इस संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां और दस्तावेज सौंपे हैं।
‘मुझे बुखार लगेगा तो पैरासिटामोल खा लेंगे। नीरज कुमार चिंता न करें। वे डॉक्टर तो हैं नहीं और जल्दी ही बेरोजगार होने वाले हैं।’
नीरज कुमार ने दी थी जुबान पर काबू रखने की नसीहत
इससे पहले, जेडीयू विधान पार्षद नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर को भाषा की मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार की नीतियों की आलोचना करना उचित है, लेकिन व्यक्तिगत आक्षेपों से बचना चाहिए। नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर को अपनी जुबान पर काबू रखने की नसीहत देते हुए याद दिलाया था कि वे पहले नीतीश कुमार के साथ जुड़े रहे हैं और उन्हीं का ‘नमक खा चुके’ हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर वे प्रशांत किशोर का ‘बुखार छुड़ा’ देंगे।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 को मतगणना
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान 23 अक्टूबर को होना निर्धारित है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। इस चुनाव से पहले दोनों प्रमुख नेताओं के बीच चल रही यह तीखी जुबानी लड़ाई मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, जो निश्चित तौर पर चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है।







