Bihar Education News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बिहार में शिक्षा के भविष्य और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प पर महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने अभिभावकों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि बच्चों पर अपनी पसंद थोपने से बचना चाहिए। पटना के
बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज के विद्यार्थियों और युवाओं की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण होगी।
‘विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में आज के विद्यार्थियों और युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। वर्ष 2047 में जब देश स्वतंत्रता की शताब्दी मना रहा होगा, तब आज के विद्यार्थी भारत के विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे होंगे।’
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट किया कि इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य केवल पुरस्कार देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के विचारों, कल्पनाओं और प्रतिभा को पहचानना है। उन्होंने कहा कि भाषणों के माध्यम से बच्चों ने अपने विचार रखे, वहीं चित्रकला के जरिए विकसित भारत को लेकर अपनी कल्पना सामने रखी। यह उनकी रचनात्मक क्षमता और देश के भविष्य के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है।
अभिभावकों से अपील: बच्चों की रुचि को दें प्राथमिकता
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि वे बच्चों की रुचि और प्रतिभा को पहचानें। हर बच्चे की क्षमता और पसंद अलग होती है। किसी बच्चे की रुचि खेल में हो सकती है, तो कोई कला, विज्ञान, तकनीक या किसी अन्य क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ऐसे में अभिभावकों को अपनी पसंद बच्चों पर थोपने के बजाय उनकी वास्तविक रुचि को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार अभिभावक बच्चों को अपनी अपेक्षाओं के अनुसार आगे बढ़ने के लिए बाध्य करते हैं, जिससे उनकी स्वाभाविक प्रतिभा प्रभावित हो सकती है। बच्चों को उनकी रुचि पहचानकर प्रोत्साहित करना जरूरी है, ताकि वे अपनी क्षमता के अनुरूप सफलता हासिल कर सकें।
ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था और बिहार की गौरवशाली परंपरा
ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह व्यक्ति के विकास के साथ-साथ आर्थिक प्रगति और नवाचार का आधार है। दुनिया तेजी से ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। इसके लिए विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी कौशल, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने बिहार की ऐतिहासिक शैक्षणिक परंपरा का भी उल्लेख किया और कहा कि नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को ज्ञान की रोशनी दी। राज्य की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और अटल टिंकरिंग लैब का महत्व
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों के समग्र विकास पर केंद्रित है। बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग, गतिविधियों, अनुसंधान और नए विचारों के माध्यम से सीखने के अवसर दिए जाने चाहिए। उन्होंने अटल टिंकरिंग लैब जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि ये विद्यालयों में नवाचार की संस्कृति विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन लैब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोग और नवाचार के लिए मंच मिलता है, जिससे वे अपनी कल्पनाओं को व्यवहार में ला सकते हैं।
मातृभाषा में शिक्षा और व्यापक उद्देश्य
प्रह्लाद जोशी ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल अंग्रेजी सीखना ही सफलता की गारंटी नहीं है। बच्चों को अपनी भाषा में सोचने, समझने और विचार व्यक्त करने का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि मातृभाषा में सीखने से विषयों को समझना आसान होता है। उन्होंने डिजिटल शिक्षा सामग्री के विस्तार की आवश्यकता पर भी बल दिया। अंत में, उन्होंने विद्यार्थियों से केवल परीक्षा पास करने के उद्देश्य से पढ़ाई न करने, बल्कि जीवन की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने की अपील की। शिक्षा का व्यापक उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना, उनमें निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
38 जिलों के 95,195 स्कूलों की भागीदारी
इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि बिहार के सभी 38 जिलों के 95,195 सरकारी और निजी स्कूलों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इतनी बड़ी संख्या में विद्यालयों की भागीदारी बताती है कि विद्यार्थियों में अपनी प्रतिभा दिखाने और देश के भविष्य के बारे में सोचने का उत्साह है। उन्होंने कहा कि पुरस्कार इन क्षमताओं को पहचान देने और विद्यार्थियों को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का माध्यम हैं।
प्रह्लाद जोशी ने विद्यार्थियों से अपने सपनों को बड़ा रखने और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज के विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, नवाचार और सकारात्मक सोच से लैस होना होगा। परिवार, विद्यालय और सरकार को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिसमें प्रत्येक बच्चे को अपनी क्षमता पहचानने और आगे बढ़ने का अवसर मिले।








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