Bihar Kidney Transplant: पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयुष्मान भारत योजना के तहत पहला किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए आधुनिक और महंगी चिकित्सा को सुलभ बना दिया है। दरभंगा जिले के पचगछिया निवासी 31 वर्षीय मरीज को उसकी 24 वर्षीय पत्नी ने अपनी किडनी दान कर नया जीवन दिया। बुधवार को सफल प्रत्यारोपण के बाद स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने पर मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह एम्स पटना में कुल मिलाकर 15वां सफल किडनी प्रत्यारोपण है।
आयुष्मान भारत से गरीब मरीजों को बड़ी राहत
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिली है। करीब तीन लाख रुपये की लागत से हुए इस जटिल ऑपरेशन का पूरा खर्च आयुष्मान भारत योजना ने उठाया, जिससे पीड़ित परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं आया। इस सुविधा के कारण अब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए भी किडनी ट्रांसप्लांट कराना संभव हो गया है।
एम्स पटना के निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने इस महत्वपूर्ण पहल पर चिकित्सकों की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैशलेस किडनी प्रत्यारोपण की व्यवस्था गरीब और असहाय मरीजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। धन के अभाव में जो मरीज महंगा प्रत्यारोपण नहीं करा पाते थे, अब उन्हें इस योजना के माध्यम से नया जीवन मिल सकेगा।’
मुफ्त दवाएं और जटिलताओं के उपचार का प्रावधान
नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अमरेश कृष्ण ने इस योजना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों को सर्जरी के बाद एक वर्ष तक आवश्यक दवाइयां मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, प्रत्यारोपण के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी संभावित स्वास्थ्य संबंधी जटिलता के लिए नि:शुल्क उपचार की सुविधा भी इस योजना में शामिल है।
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश गुंजन ने बताया कि इस पूरे किडनी ट्रांसप्लांट में लगभग तीन लाख रुपये का व्यय हुआ है। आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस इलाज से अब यह महंगा उपचार भी आम आदमी की पहुँच में आ गया है।
महंगा इलाज हुआ सुलभ, डॉक्टर्स ने दी बधाई
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, नेफ्रोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मेघा सहगल, यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. विपिन चंद्र, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. साकेत सिंह व डॉ. नवीन कुमार, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) निशांत सहाय, प्रो. (डॉ.) अजीत कुमार, अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अभ्युदय कुमार और डॉ. नीरज कुमार सहित कई प्रमुख चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे। इस सफल प्रत्यारोपण ने यह साबित कर दिया है कि सही नीतियों और समर्पित प्रयासों से महंगी चिकित्सा भी आम जनता तक पहुंचाई जा सकती है, जिससे कई जिंदगियां बच सकती हैं।







