Meira Kumar: पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को पांच दशक पुराने जमीन विवाद में पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई उनकी जमीन के लिए उचित मुआवजा पाने का वास्तविक हकदार माना है। इस महत्वपूर्ण फैसले से पटना के जिलाधिकारी द्वारा जारी वह पुराना प्रशासनिक आदेश पूरी तरह निरस्त हो गया, जिसके तहत परिवार की जमाबंदी रद्द कर दी गई थी।
यह पूरा मामला पटना शहर के मैनपुरा इलाके में स्थित करीब 18 कट्ठा 10 धूर जमीन से जुड़ा है। बिहार सरकार ने वर्ष 1975-76 के दौरान यहां नाला निर्माण कार्य पूरा कराने के उद्देश्य से इस भूमि का अधिग्रहण किया था। हालांकि, नाले का निर्माण होने के बावजूद जमीन की मूल स्वामी इंद्राणी देवी और उनकी कानूनी उत्तराधिकारी मीरा कुमार को तय मुआवजा कभी नहीं मिला। इसके उलट, 12 अप्रैल 2023 को जिला प्रशासन ने एक आदेश जारी करते हुए निजी जमाबंदी रद्द कर दी और जमीन को ‘गैरमजरुआ आम’ श्रेणी में दर्ज कर दिया था।
जिलाधिकारी का आदेश कानून सम्मत नहीं
न्यायमूर्ति खतीम रजा की एकल पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी की कार्रवाई को कानून सम्मत नहीं माना। पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मीरा कुमार के परिवार के नाम दर्ज पुरानी जमाबंदी को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए। अदालत ने बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धाराओं 3 और 4(एच) के कानूनी प्रावधानों को रेखांकित किया।
पीठ ने कहा कि किसी भी जमीन पर धारा 4(एच) के तहत कदम उठाने से पहले यह साबित करना अनिवार्य है कि वह संपत्ति कानूनी रूप से राज्य सरकार में निहित हो चुकी है, जिसका कोई ठोस सरकारी गजट या अधिसूचना सरकार पेश नहीं कर सकी।
दशकों पुराने रिकॉर्ड को मनमाने ढंग से रद्द नहीं कर सकते
अदालत ने अपनी आधिकारिक जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि इस जमीन की मूल बंदोबस्ती वर्ष 1941 में की गई थी। भूमि सुधार कानून की धारा 4(एच) के नियम केवल 1 जनवरी 1946 के बाद हुए हस्तांतरण या बंदोबस्त पर ही प्रभावी होते हैं। ऐसे में, 1941 के कानूनी बंदोबस्त को इस धारा के तहत गलत नहीं ठहराया जा सकता था। अदालत ने साफ शब्दों में टिप्पणी की कि दशकों से चले आ रहे राजस्व रिकॉर्ड और वैधानिक जमाबंदी को कोई भी प्रशासनिक अधिकारी संक्षिप्त प्रक्रिया अपनाकर मनमाने तरीके से रद्द नहीं कर सकता। इस फैसले से मीरा कुमार को अपने पुश्तैनी जमीन के लिए लंबे समय से लंबित मुआवजे का रास्ता खुल गया है।







