Bihar Dowry Death: बिहार में दहेज हत्या के एक जघन्य मामले में न्याय का पहिया चला है। मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र में रितु देवी की दहेज के लिए हत्या के मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार पांडेय के न्यायालय ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने मृतका के पति अखिलेश कुमार उर्फ अमलेश राय, ससुर रासलाल राय और सास भवानी देवी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले से दहेज लोभियों को कड़ा संदेश गया है।
न्यायालय ने तीनों दोषियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत आजीवन सश्रम कारावास की सजा के साथ 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि वे जुर्माने की राशि जमा नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत भी प्रत्येक दोषी को 10-10 वर्ष के कारावास और 25-25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी गई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

दोषियों से वसूले गए जुर्माने की आधी राशि परिजनों को मिलेगी
लोक अभियोजक शिव शंकर प्रसाद राय ने बताया कि न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इसके तहत, दोषियों से जुर्माने के रूप में वसूल की गई कुल राशि का आधा हिस्सा आवेदक या उनके परिवारजनों को प्रदान किया जाएगा। यह राशि पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। इसके अलावा, मामले में हुई मानसिक प्रताड़ना के लिए क्षतिपूर्ति प्राप्त करने हेतु आवेदक जिला विधिक सेवा प्राधिकार में आवेदन करने के लिए स्वतंत्र हैं। सरकार की ओर से लोक अभियोजक शिव शंकर प्रसाद राय ने आरोपियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता जय किशोर सिंह ने कम से कम सजा देने का अनुरोध किया था।
2020 में हुई थी रितु देवी की गला दबाकर हत्या
यह दुखद घटना 18 मई 2020 को घटी थी। लोक अभियोजक के अनुसार, मृतका रितु देवी की शादी वर्ष 2016 में बाबूबरही थाना क्षेत्र के घधौंर निवासी अखिलेश कुमार उर्फ अमलेश राय से हुई थी। शादी के बाद से ही सभी आरोपी रितु देवी को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। 18 मई 2020 को रितु देवी के भाई राम कुमार राय को सूचना मिली कि उनकी बहन की दहेज के लिए गला दबाकर हत्या कर दी गई है। इस सूचना के बाद राम कुमार राय ने तत्काल थाने पहुंचकर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।
“दोषियों से जुर्माने की राशि वसूल होने पर उसका आधा हिस्सा आवेदक या उनके परिजन को दिया जाए। मानसिक प्रताड़ना की क्षतिपूर्ति के लिए आवेदक जिला विधिक सेवा प्राधिकार में आवेदन दे सकती हैं।”
— लोक अभियोजक शिव शंकर प्रसाद राय
दहेज हत्या रोकने के लिए कड़े संदेश की उम्मीद
इस फैसले से समाज में दहेज जैसी कुरीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश जाएगा। न्यायालय का यह निर्णय उन परिवारों के लिए एक उम्मीद है जो दहेज उत्पीड़न का शिकार होते हैं। यह दिखाता है कि कानून ऐसे अपराधों को गंभीरता से लेता है और दोषियों को कड़ी सजा देने में संकोच नहीं करता है। उम्मीद है कि यह फैसला भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सहायक सिद्ध होगा।







