Bihar Train Accident: बिहार में एक बार फिर ट्रेन पलटने की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। महरैल स्टेशन के पास सुबह आनंद विहार जा रही 04013 स्पेशल ट्रेन को बेपटरी करने की कोशिश की गई, लेकिन लोको पायलट की सूझबूझ से एक भयानक बिहार ट्रेन दुर्घटना टल गई। इस घटना ने एक बार फिर झंझारपुर-लौकहा रेलखंड पर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पटना: यारपुर आउट सिग्नल पर ओवरहेड तार में लगी आग, एक घंटे तक रेल परिचालन प्रभावित
पटना के यारपुर आउट सिग्नल पर ओवरहेड बिजली के तार में आग लगने से रेल परिचालन करीब एक घंटे तक बाधित रहा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका है। घटना के बाद रेलकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई।

इधर, मधुबनी में अलसुबह करीब 3:30 बजे यह घटना तब हुई जब लौकहा बाजार से आनंद विहार जा रही 04013 स्पेशल ट्रेन महरैल स्टेशन के लाइन नंबर एक से गुजर रही थी। लोको पायलट उपेंद्र भंडारी की नजर फुट ओवरब्रिज के पास ट्रैक पर रखे कंक्रीट बेंच के एक स्लैब पर पड़ी।
उन्होंने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी। ट्रेन स्लैब से लगभग 50 फीट पहले ही रुक गई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना की जानकारी मिलते ही यात्रियों में कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया। स्टेशन अधीक्षक बिंदेश्वर झा ने तुरंत रेलकर्मियों से स्लैब हटवाया और कंट्रोल रूम को सूचना दी। सुरक्षा जांच के बाद सुबह 3:44 बजे ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया।
घटना के समय प्लेटफॉर्म भी सूना था, क्योंकि इस ट्रेन का महरैल स्टेशन पर ठहराव नहीं था। सूचना मिलते ही आरपीएफ पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रुद्रपुर थाना क्षेत्र के महरैल कर्णपुर चौक निवासी असमत अंसारी और एक नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती घटनाएं
पूर्व मध्य रेलवे के झंझारपुर-लौकहा और लोहना-झंझारपुर-निर्मली रेलखंड पर यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। महरैल में ट्रेन पलटने की यह साजिश कोई पहली घटना नहीं है। कुछ महीने पहले झंझारपुर-निर्मली रेलखंड के तमुरिया स्टेशन के पास भी इसी तरह की साजिश रची गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने इन रेलखंडों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
करीब 70 किलोमीटर के विशाल रेल नेटवर्क की सुरक्षा का जिम्मा मात्र दो अधिकारियों और चार जवानों के कंधों पर है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के पास बल की भारी कमी के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद दिख रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन दोनों रेलखंडों पर राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) का न तो कोई थाना या चौकी है और न ही एक भी अधिकारी या जवान की तैनाती की गई है।
यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे
यदि रेल यात्रा के दौरान किसी यात्री के साथ कोई अप्रिय घटना या आपराधिक वारदात होती है, तो उसे अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए लगभग 50 किलोमीटर दूर दरभंगा रेल थाना जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर त्वरित पुलिस सहायता न मिलने के कारण यात्रियों में लगातार असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल मजबूत करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

















