Bhagalpur Prince Kumar: प्रतिभा किसी भी सुविधा की मोहताज नहीं होती, यह बात भागलपुर के प्रिंस कुमार ने सच कर दिखाई है। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद प्रिंस ने अपनी मेहनत और लगन से भारतीय पेनकैक सिलाट टीम में जगह बनाकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे बिहार का नाम रोशन किया है। झालमुरी बेचकर घर चलाने वाले पिता का यह बेटा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने को तैयार है।
किलकारी बाल भवन से मिली उड़ान
प्रिंस कुमार का चयन भारतीय पेनकैक सिलाट टीम में हुआ है। वह पिछले कई वर्षों से किलकारी बिहार बाल भवन, भागलपुर में प्रशिक्षण ले रहे थे। उनकी इस उपलब्धि से किलकारी बिहार बाल भवन के कंपनीबाग परिसर में खुशी का माहौल है, जहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर प्रिंस की सफलता की जानकारी साझा की गई। किलकारी से जुड़े पदाधिकारियों और कराटे प्रशिक्षक ने प्रिंस की इस यात्रा को प्रेरणादायक बताया।
प्रशिक्षक कुंदन कुमार ने बताया, ‘प्रिंस बेहद मेधावी और मेहनती खिलाड़ी हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा और लगातार अभ्यास के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।’
कुंदन कुमार ने आगे कहा कि प्रिंस की सफलता उन युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो अभावों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए आर्थिक सहयोग की अपील
प्रिंस कुमार के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्हें भेजना एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। प्रशिक्षक कुंदन कुमार ने शहर के गणमान्य लोगों और समाजसेवियों से प्रिंस को आर्थिक सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने विश्वास जताया कि चंदा जुटाकर प्रिंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए भेजा जा सकेगा और वह देश व भागलपुर का नाम रोशन करेंगे।
प्रिंस के पिता ने भावुक होकर बताया, ‘मैं झालमुरी बेचकर अपने परिवार का जीवनयापन करता हूं। सीमित आमदनी के बावजूद मैंने अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया है। मुझे उम्मीद है कि मेरा बेटा आगे भी बेहतर प्रदर्शन करेगा और परिवार के साथ-साथ पूरे देश का गौरव बढ़ाएगा।’
किलकारी के पदाधिकारी साहिल राज ने भी प्रिंस के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह आने वाले समय में और बेहतर प्रदर्शन करेंगे। प्रिंस की यह उपलब्धि दर्शाती है कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर प्रतिभा दुनिया के सामने अपनी पहचान बना सकती है। अब जरूरत है कि समाज और सरकार आगे आकर इस युवा खिलाड़ी के हौसलों को आर्थिक उड़ान दें, ताकि झालमुरी बेचने वाले का बेटा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा लहरा सके।

















