Bihar Ganga Path: बिहार के भागलपुर और मुंगेर के बीच गंगा किनारे सफर को आसान बनाने वाली बहुप्रतीक्षित मरीन ड्राइव परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। लगभग 83.189 किलोमीटर लंबे चार लेन के गंगा पथ के निर्माण के लिए जल संसाधन विभाग ने बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) को अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी करने की अनुमति प्रदान की है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ कई सख्त शर्तें भी जोड़ी गई हैं, जिनमें गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित न करना और कटाव से सुरक्षा प्रमुख हैं।
इस परियोजना से भागलपुर, सुल्तानगंज और मुंगेर के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने और आवागमन सुविधाजनक बनने की उम्मीद है। जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण के दौरान किसी भी स्थिति में गंगा की धारा अवरुद्ध नहीं होनी चाहिए। साथ ही, सड़क और आसपास के इलाकों को नदी के कटाव से बचाने के लिए प्रभावी सुरक्षात्मक उपाय भी करने होंगे।
83 किलोमीटर लंबे गंगा पथ का निर्माण दो हिस्सों में
प्रस्तावित गंगा पथ का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (एचएएम) के तहत दो अलग-अलग हिस्सों में होगा। दोनों हिस्सों को मिलाकर सड़क की कुल लंबाई 83.189 किलोमीटर होगी, जिसमें जमीन पर बनने वाली एट-ग्रेड सड़क और जरूरत के अनुसार एलिवेटेड हिस्से शामिल हैं।
| हिस्सा | विस्तार | कुल लंबाई (किमी) | एट-ग्रेड सड़क (किमी) | एलिवेटेड सड़क (किमी) | अन्य (किमी) |
|---|---|---|---|---|---|
| पहला हिस्सा | सुल्तानगंज-भागलपुर-सबौर को जोड़ने वाला | 41.258 | 30.698 | 10.56 | रैंप: 0.533, सर्विस रोड: 0.44, कनेक्टिंग रोड: 3.882 |
| दूसरा हिस्सा | मुंगेर के सफियाबाद से बरियारपुर, घोरघट होते हुए सुल्तानगंज तक | 41.931 | 30.051 | 11.88 | कनेक्टिंग रोड: 0.957 |
इस विस्तृत योजना से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आएगा, जिससे लोगों को यात्रा में आसानी होगी और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
गंगा की धारा को लेकर सख्त शर्तें, कटाव से बचाव प्राथमिकता
गंगा पथ के निर्माण को लेकर जल संसाधन विभाग की सबसे महत्वपूर्ण शर्त नदी के प्राकृतिक प्रवाह से जुड़ी है। विभाग ने साफ किया है कि निर्माण के दौरान गंगा की धारा को किसी भी कीमत पर अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। नदी के किनारे सड़क बनाते समय पानी के बहाव, बाढ़ की स्थिति और तटों की स्थिरता का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य होगा। परियोजना की अंतिम योजना और निर्माण प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्था करनी होगी, जिससे गंगा के प्रवाह पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। यह शर्त इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नदी के प्राकृतिक बहाव में बदलाव होने से आसपास के तटवर्ती इलाकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्माण के दौरान गंगा की धारा को किसी भी तरह अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। नदी के किनारे सड़क बनाने में पानी के बहाव, बाढ़ और तटों की स्थिरता का ध्यान रखना जरूरी होगा।
इसके अतिरिक्त, विभाग ने भागलपुर में ट्रिपल आइटी के सामने और ममलखा गांव के पास कटाव की आशंका को देखते हुए विशेष सुरक्षात्मक उपाय करने की शर्त भी रखी है। इन संवेदनशील स्थानों पर सड़क निर्माण की योजना बनाते समय नदी किनारे की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखना होगा। संयुक्त निरीक्षण के आधार पर, दूसरे हिस्से के कुछ स्थानों पर एट-ग्रेड सड़क के बजाय एलिवेटेड सड़क बनाने के प्रस्ताव को भी अंतिम योजना में शामिल करने का निर्देश दिया गया है। सड़क की संरचना तय करते समय केवल दूरी और निर्माण लागत ही नहीं, बल्कि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और संभावित जोखिमों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
उच्चतम बाढ़ स्तर से 1.80 मीटर ऊंचा रहेगा सड़क का तल
गंगा पथ के निर्माण में बाढ़ से सुरक्षा को भी एक अहम शर्त के रूप में शामिल किया गया है। जल संसाधन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सड़क का तल गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) से 1.80 मीटर ऊपर रखना होगा। इस शर्त का मुख्य उद्देश्य सड़क को बाढ़ के संभावित प्रभावों से सुरक्षित रखना है। गंगा में जलस्तर बढ़ने की स्थिति को ध्यान में रखकर सड़क की ऊंचाई तय करना आवश्यक होगा, ताकि परियोजना की संरचना नदी की बाढ़ संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप बनी रहे। इन तकनीकी शर्तों का पालन करना इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता के लिए अनिवार्य होगा।
यह परियोजना भागलपुर, सुल्तानगंज, सबौर और मुंगेर के बीच बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करेगी, जिससे स्थानीय आवागमन और क्षेत्रीय संपर्क को एक नई गति मिलेगी। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता निर्माण की गति और मौजूदा मार्गों से इसके जुड़ाव पर निर्भर करेगी। अब आगे की प्रक्रिया में विभागीय शर्तों के अनुरूप परियोजना की विस्तृत योजना तैयार करना और सभी आवश्यक तकनीकी व प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को सुरक्षित रखते हुए सड़क का निर्माण करना इस परियोजना की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।







