Haryana formation history का सफर चुनौतियों, संघर्ष और अटूट जज्बे की एक मिसाल रहा है। पंजाब से अलग होकर एक नवंबर 1966 को अस्तित्व में आए Haryana ने अपनी पहचान खुद गढ़ी है। शुरुआती दौर में बंजर भूमि, सिंचाई के लिए पानी की कमी और रोजगार के सीमित अवसरों के बावजूद इस क्षेत्र ने हर कदम पर खुद को साबित किया है। आज यह राज्य न केवल प्रगति के मामले में आगे है, बल्कि कई बड़े राज्यों को भी पछाड़ चुका है.
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अलग राज्य की मांग
हरियाणा को अलग राज्य बनाने की मांग सबसे पहले वर्ष 1923 में स्वामी सत्यानंद ने लाहौर में उठाई थी। इसके बाद दीनबंधु सर छोटूराम की अध्यक्षता में मेरठ में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस के दौरान भी यह आवाज बुलंद की गई। देशबंधु गुप्ता, पंडित नेकीराम शर्मा और पंडित श्रीराम शर्मा ने अलग राज्य के गठन के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। वर्ष 1952 के पहले आम चुनाव में हरियाणा क्षेत्र से चौधरी देवीलाल समेत कांग्रेस के 38 विधायक चुने गए। इसके बाद चौधरी देवीलाल और चौधरी चरण सिंह ने उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा क्षेत्र के 125 विधायकों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री जीबी पंत को सौंपा था।
वर्ष 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग के समक्ष भी अलग राज्य की मांग रखी गई। अंततः 23 अप्रैल 1966 को पंजाब सीमा आयोग का गठन किया गया और इसकी सिफारिशों के आधार पर एक नवंबर 1966 को हरियाणा को नए राज्य के रूप में मान्यता मिली। 12 जून 1966 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आकाशवाणी पर इसके गठन की घोषणा की थी, जिसके बाद सात सितंबर को विधेयक पारित हुआ और 18 सितंबर को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हुए.
कृषि, अर्थव्यवस्था और औद्योगिक प्रगति
किसानों की कड़ी मेहनत से बंजर जमीन आज उपजाऊ बन चुकी है। धान की उपज में सात गुना और गेहूं की पैदावार में करीब चार गुना वृद्धि हुई है। केंद्रीय खाद्यान्न भंडार में अन्न योगदान देने के मामले में राज्य दूसरे स्थान पर है। आर्थिक सलाहकार परिषद के अनुसार, हरियाणा की प्रति पंजाब के मुकाबले काफी बढ़ चुकी है और वर्तमान में प्रति प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी हो चुकी है। देश की जीडीपी में हरियाणा की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। औद्योगिक और डिजिटल मोर्चे पर परिवार पहचान पत्र, स्वामित्व योजना और ऑनलाइन स्थानांतरण जैसी नीतियों से प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा सुधार आया है.
| विकास क्षेत्र | प्रमुख उपलब्धि या परियोजना |
|---|---|
| परिवहन एवं एक्सप्रेस-वे | केएमपी, केजीपी, 152-डी अंबाला-कोटपूतली ग्रीन फील्ड कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे |
| विमानन सेवाएं | हिसार में महाराजा अग्रसेन हवाई अड्डा और अंबाला हवाई अड्डे का विकास |
| ऐतिहासिक स्थल | हिसार का बनावाली और राखीगढ़ी (5000 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता) |
इन प्रमुख आधारभूत परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार से राज्य के विभिन्न जिलों का संपर्क सीधा राष्ट्रीय राजधानी और पड़ोसी राज्यों से मजबूत हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे के जाल ने आवागमन को बेहद सुगम बना दिया है.
प्रमुख चुनौतियां और भविष्य की दिशा
आर्थिक विकास के मोर्चे पर असीम सफलता हासिल करने के बावजूद सामाजिक मापदंडों पर अभी कई मोर्चों पर काम करना बाकी है। कन्या भ्रूण हत्या, शिशु एवं मातृ मृत्यु दर, कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने के साथ-साथ महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा एसवाईएल नहर, चंडीगढ़ पर दावा और विश्वविद्यालयों की संबद्धता जैसे पुराने विवादित मुद्दों का समाधान निकालकर भविष्य की राह को और अधिक सुदृढ़ बनाना होगा.







