Bhagalpur Ganga digital mapping प्रक्रिया के तहत Bhagalpur में बाढ़ और कटाव की समस्या से निपटने के लिए ऐतिहासिक सुरक्षा प्रबंधों को आधुनिक तकनीक से लैस करने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। गंगा नदी के आक्रामक रुख और लगातार बदलते जल प्रवाह के बीच अब ब्रिटिशकालीन धरोहरों और पुराने सुरक्षा तंत्रों की नए सिरे से निगरानी की जाएगी।
ब्रिटिशकालीन और जमींदारी तटबंधों की होगी मैपिंग
क्षेत्र के पुराने और मजबूत माने जाने वाले हाई लेवल बांध तथा जमींदारी तटबंध दशकों से प्रलयकारी बाढ़ के खिलाफ मुख्य दीवार का काम करते आए हैं। अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से इन संरचनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा ताकि समय रहते कमजोर हिस्सों को दुरुस्त किया जा सके।
उपग्रह और ड्रोन तकनीक का होगा इस्तेमाल
बाढ़ प्रबंधन की इस नई रणनीति में तकनीकी पक्ष को सबसे मजबूत बनाया जा रहा है। उपग्रह यानी सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन कैमरों की मदद से कटाव के संवेदनशील इलाकों की मैपिंग होगी। इससे पानी के दबाव और मिट्टी के कटाव की सटीक जानकारी समय पर मिल सकेगी।
गंगा के बदलते तेवर और लगातार बढ़ते कटाव के दायरे को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह आधुनिक बनाने की रूपरेखा तैयार की गई है।
भविष्य के लिए सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम
स्थानीय स्तर पर बाढ़ और कटाव की मार झेलने वाले दियारा तथा मैदानी इलाकों के लिए यह नई पहल बेहद अहम मानी जा रही है। डिजिटल मैपिंग के जरिए मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर भविष्य में बाढ़ सुरक्षा योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।







