बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर हुए बम ब्लास्ट मामले की बड़ी जानकारी आ रही है। ब्लास्ट की सच्चाई भी सामने आ गई है। इसको लेकर लोकसभा में गृह मंत्रालय ने जवाब दिया है। गृह मंत्रालय ने कहा है, दरभंगा बम ब्लास्ट विदेश आधारित आतंकी संगठन की साजिश थी।
नासिर ने पूछताछ में कबूला

दरभंगा पार्सल ब्लास्ट मामले (Darbhanga Parcel Blast Case) में एनआईए (NIA) को बड़ी कामयाबी मिली( ब्लास्ट मामले में एनआईए ने लश्कर -ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया।






इन दोंनों ही आतंकियों को हैदराबाद (Hyderabad) से हिरासत में लिया गया। आतंकियों ने केमिकल के इस्तेमाल से आईईडी बम तैयार किया था। इस बात को दबोचे गए दो सगे भाई इमरान मलिक और मोहम्मद नासिर खान उर्फ नासिर ने पूछताछ में कबूला। उनकी साजिश दरभंगा-सिकंदराबाद ट्रेन को रास्ते में उड़ाने की थी।
एआईए के एक प्रवक्ता के मुताबिक यह पूरी साजिश पाकिस्तान (Pakistan) में रची गई थी। वहीं से कंट्रोल की जा रही थी। एनआईए के मुताबिक नासिर 2012 में ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान गया था। वहां उसे लश्कर के आतंकी संगठन में ट्रेनिंग दी गई। यहां उसने केमिकल से आईईडी बम बनाना सीखा। दोनों आतंकी भाइयों ने इसी तकनीक का ट्रेन उड़ाने की साजिश में प्रयोग किया था।
दरभंगा जंक्शन पर पार्सल में रखे बम ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस मामले में एक-एक कर के कई गिरफ्तारियां हुई थी और कई खुलासे हुए थे।
दो सगे भाइयों ने सुना दी वारदात की पूरी दास्तांन
हैदराबाद में दबोचे गए यूपी के दो सगे भाइयों मो. इमरान मलिक और मो. नासिर मलिक से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में इन दोनों भाइयों ने एनआईए को कई राज बताए हैं। जानकारी के अनुसार सिकंदराबाद-दरभंगा ट्रेन की पार्सल वैन में रखे केमिकल विस्फोटक को सिकंदराबाद स्टेशन से 132 किमी दूर काजीपेट जंक्शन पर ब्लास्ट कराने की साजिश थी।
अपने आकाओं के संपर्क में थे आतंकी
जांच में यह भी सामने आ रहा है कि घटना के दौरान दोनों आतंकी अपने हैंडलर से संपर्क में बने हुए थे और वे आपस में बात करने के लिए सुरक्षित संचार माध्यमों का प्रयोग कर रहे थे। दोनों आतंकी हैदराबाद के नामपल्लई में रहते हैं जबकि ये मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले हैं।
एनआईए ने 17 जून को दरभंगा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर एक पार्सल में हुए विस्फोट की जांच अपने हाथ में ली थी। इसके बाद दोनों आतंकी जांच एजेंसी के निशाने पर थे। जांच से पता चला कि पार्सल सिकंदराबाद में बुक किया गया था और सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस से वहां पहुंचा था।
एनआईए के प्रवक्ता ने कहा कि इन दोनों आतंकियों ने ही विस्फोटक (आईईडी) को कपड़े के पार्सल में पैक कर ट्रेन में रखा था। इनका मकसद चलती ट्रेन में विस्फोट करके जान माल की बड़ी हानि करना था, लेकिन ये अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए।
दहशतगर्दों ने लोकल केमिकल का इस्तेमाल कर आईईडी तैयार तैयार किया था। पर वे अपनी साजिश में कामयाब नहीं हो पाए। दरभंगा पार्सल ब्लास्ट मामले में हैदराबाद में दबोचे गए सगे भाई इमरान मलिक उर्फ इमरान खान और मो. नासिर खान उर्फ नासिर मलिक से शुरुआती पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पूरी साजिश पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के इशारे पर रची गई थी। दोनों भाइयों को जल्द ही एनआईए ट्रांजिट रिमांड पर पटना लाएगी।
आतंकियों की साजिश इस केमिकल बम को मध्य रात्रि में ब्लास्ट कराने की थी, ताकि अधिक से अधिक नुकसान हो। हालांकि विभिन्न कारणों से आतंकी अपनी इस साजिश में कामयाब नहीं हो सके। यह केमिकल बम 17 जून को अपराह्न में दरभंगा जंक्शन पर ब्लास्ट हुआ। लेकिन अगर चलती ट्रेन में विस्फोट कराने की आतंकियों की यह साजिश सफल हो जाती तो कई लोगों की जान जा सकती थी। आतंकियों का साजिश बम को चलती ट्रेन में 15-16 जून की मध्य रात्रि को विस्फोट कराना था। उससे पूरी ट्रेन में आग लगती और बड़ा हादसा हो जाता।
जानकारी के अनुसार 15 जून की रात 10 बजे के आसपास सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस सिकंदराबाद से रवाना हुई थी। इस ट्रेन का पहला स्टॉपेज काजीपेट जंक्शन है। यहां तक पहुंचने में इस ट्रेन को एक घंटे 54 मिनट का समय लगता है। आतंकियों की साजिश ट्रेन के काजीपेट से खुलने के बाद विस्फोट करने की थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। धमाका तब हुआ जब पार्सल को दरभंगा जंक्शन पर उतारा जा चुका था।
एनआईए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, नासिर वर्ष 2012 में पाकिस्तान गया था। वहां उसने लश्कर के आतंकियों से ट्रेनिंग दी थी। इस दौरान उसे लोकल केमिकल का इस्तेमाल कर आईईडी बनाना भी सिखाया गया था।
गिरफ्त में आए नासिर और इमरान ने सिकंदराबाद-दरभंगा ट्रेन में ब्लास्ट के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आईईडी तैयार किया था। हालांकि किसी कारणवश ट्रेन में धमाका नहीं हो पाया। दोनों ने पार्सल में जो आईईडी रखा था, वह बेहद खतरनाक है। धमाके के बाद इससे ट्रेन आग की चपेट में आ सकती थी।
दोनों भाई लश्कर के अपने हैंडलर के संपर्क में थे और उसी के इशारे पर ट्रेन में धमाका करने की साजिश रची गई थी। आतंकी धमाके के जरिए जानमाल को बड़ा नुकसान पहुंचाना था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि दोनों भाई अपने हैंडलर से बात करने के लिए सुरक्षित संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे। नासिर और इमरान फिलहाल हैदराबाद के नामपल्लई में रहते थे पर दोनों मूलत: उत्तर प्रदेश के शामली के हैं।
हैदराबाद से सुफियान नामक शख्स ने भेजा था पार्सल
दरभंगा में जिस पार्सल में विस्फोट हुआ था, उसे हैदराबाद से सुफियान नामक शख्स ने भेजा था. पुलिस का कहना है कि यह शख्स फर्जी है, क्योंकि दरभंगा में यह पार्सल सुफियान नाम के ही व्यक्ति के लिए भेजा गया गया था। वहीं इसके साथ दिया गया नंबर भी बिहार और हैदराबाद में किसी के नाम पर रजिस्टर्ड नहीं मिला है। पुलिस जानकारी के अनुसार पार्सल के साथ दिया गया नंबर उत्तर प्रदेश के शामली का है।
गृह मंत्रालय का कहना है
विदेशी आतंकी संगठन ने यह साजिश रची थी। चलती ट्रेन में बड़े धमाके की साजिश रची गई थी। इस मामले की जांच हैदराबाद तक हुई थी। यूपी में भी इसकी जांच की गई थी। इस ब्लास्ट की तार पाकिस्तान से भी जुड़े होने की बात सामने आई थी। दरभंगा में स्लीपर सेल के जरिए किसी बड़ी साजिश की तैयारी की जा रही थी। यही कारण था कि पार्सल बुकिंग में फर्जी जानकारियां दी गई थी।








