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फ़रवरी, 14, 2026
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Ahmedabad Blast Case: अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में कोर्ट की ऐतिहासिक सजा, 49 में 38 लोगों को फांसी; 11 को उम्रकैद, देश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सजा-ए-मौत

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Ahmedabad Serial Blast में ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। साल 2008 में गुजरात के अहमदाबाद (Ahmedabad) में हुए सीरियल बम धमाकों (Bomb Blast) के मामले में दोषियों को सजा सुना दी गई है।

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विशेष न्यायाधीश एआर पटेल की अदालत ने 49 अभियुक्तों में से 38 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इन 38 दोषियों को IPC 302, UAPA के तहत फांसी दी गई। फैसला एक रिकॉर्ड है।

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कारण, अभी तक एक साथ इतने लोगों को कभी फांसी की सजा नहीं सुनाई गई है। बाकी 11 दोषियों को उम्र कैद की सजा मिली है। अदालत ने कहा है कि ये 11 दोषी जब तक जीवित हैं, जेल में ही रहेंगे। पढ़िए पूरी खबर

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अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को हुए सिलसिलेवार बम धमाके में 70 मिनट के भीतर 56 लोगों की मौत हो गई थी।200 से अधिक घायल हो गए थे। अदालत में 13 साल से भी ज्यादा समय तक मामला चलने के बादगत सप्ताह 49 लोगों को दोषी ठहराया गया और 28 अन्य को बरी कर दिया गया था।

Ahmedabad Blast Case: अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में कोर्ट की ऐतिहासिक सजा, 49 में 38 लोगों को फांसी; 11 को उम्रकैद, देश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सजा-ए-मौत
Ahmedabad Blast Case: अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में कोर्ट की ऐतिहासिक सजा, 49 में 38 लोगों को फांसी; 11 को उम्रकैद, देश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सजा-ए-मौत

अहमदाबाद सीरियम बम ब्लास्ट केस में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 49 दोषियों में से 38 को फांसी की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने 11 अन्य दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है।

अदालत ने इन लोगों को पहले ही दोषी करार दे दिया था और आज इन लोगों की सजा का ऐलान होना था। 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुए 21 सीरियल ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इन धमाकों की गूंज से हर कोई स्तब्ध था।

पहली बार एक साथ इतने दोषियों को फांसी की सजा

Ahmedabad Blast Case: अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में कोर्ट की ऐतिहासिक सजा, 49 में 38 लोगों को फांसी; 11 को उम्रकैद, देश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सजा-ए-मौत
Ahmedabad Blast Case: अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में कोर्ट की ऐतिहासिक सजा, 49 में 38 लोगों को फांसी; 11 को उम्रकैद, देश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सजा-ए-मौत

सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषियों को UAPA एक्ट के तहत फांसी की सजा सुनाई गई है। भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब एक मामले में 38 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

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धमाकों में गई थी 56 लोगों की जान

बता दें कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर ने सीरियल ब्लास्ट की त्रासदी झेली थी। एक के बाद एक 21 धमाकों ने पूरे शहर को हिला दिया था। इसमें 56 लोगों की जान गई थी। साथ ही 200 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में 08 फरवरी को स्पेशल कोर्ट ने  49 को दोषी और 28 लोगों को निर्दोष करार किया था। इस मामले में पहले 2 फरवरी को  फैसला आना था, लेकिन स्पेशल कोर्ट के जज एआर पाटले कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बाद इसे 8 फरवरी तक के लिए टाल दिया गया।

28 आरोपियों को बरी कर दिया गया था
अदालत ने इस मामले में 49 लोगों को दोषी करार दिया था और 28 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। 13 साल से अधिक पुराने इस मामले में अदालत ने पिछले साल सितंबर में मुकदमे की कार्यवाही पूरी कर ली थी। पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों ने साल 2002 में गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग मारे गए थे।

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सरकारी अधिवक्ता अमित पटेल ने बताया
स्पेशल जज एआर पटेल ने 49 में से 38 लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। इसके अलावा 11 शेष दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी।

आतंकियों का कहना था
कि हमने 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया था। इस मामले में कुल 77 लोग आरोपी थे, जिनमें से 28 को अदालत ने बरी कर दिया था और बाकी 49 लोगों को दोषी करार दिया था। 14 सालों तक चले मामले के बाद यह सजा सुनाई गई है।

28 आरोपियों को बरी कर दिया गया था
अदालत ने इस मामले में 49 लोगों को दोषी करार दिया था और 28 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। 13 साल से अधिक पुराने इस मामले में अदालत ने पिछले साल सितंबर में मुकदमे की कार्यवाही पूरी कर ली थी।

पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों ने साल 2002 में गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग मारे गए थे।

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78 आरोपियों से हुई थी मुकदमे की शुरुआत
अहमदाबाद में सिलसिलेवार धमाकों के कुछ दिन बाद पुलिस ने सूरत के विभिन्न इलाकों से कई बम बरामद किए थे। इसके बाद अहमदाबाद में 20 और सूरत में 15 एफआईआर दर्ज की गई थीं। अदालत की ओर से सभी 35 एफआईआर को एक साथ जोड़ देने के बाद दिसंबर 2009 में 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की शुरुआत हुई थी। इनमें से एक आरोपी बाद में सरकारी गवाह बन गया था। इस मामले में बाद में चार और आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उनका मुकदमा अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 1100 गवाहों का परीक्षण किया।

अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट से सभी दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की गई थी। वहीं बचाव पक्ष ने कम से कम सजा की अपील कोर्ट की थी। हालांकि अदालत ने 38 लोगों को फांसी की सजा सुनाई। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

अहमदाबाद विस्फोट मामले में सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एआर पटेल ने 8 फरवरी को फैसला सुनाते हुए 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने 77 में से 28 आरोपियों को बरी कर दिया था। आपको बता दें कि साल 2008 में अहमदाबाद में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। इस घटना में 56 लोगों की मौत हुई थी, साथ ही 200 लोग घायल हो गए थे।

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