
संजय कुमार राय, दरभंगा देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। सिंहवाड़ा प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एएनएम अनीता कुमारी ने पति के नाम पर दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने में जो किरदार निभाई उसमें प्रभारी चिकित्सा प्रभारी और सिविल सर्जन के किरदार भी दागदार हैं।
इस दिव्यांगता के प्रमाण पत्र का खेल विगत चार वर्षों से अधिक समय से हो रहा हैं। तात्कालीन सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र कुमार झा ने ज्ञापांक 3285 दिनांक 24 दिसंबर 19 को सभी विकलांगिता प्रमाण पत्र को रद कर दिया था। साथ ही, पूर्व में बने प्रमाण पत्र और आयकर में ली गई छूट को अनदेखी कर दिया।
यह प्राथमिकी उस वक्त ही होनी चाहिये थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वजह बताया जा रहा है कि उस वक्त के सिविल सर्जन और प्रभारी चिकित्सा प्रभारी बैचमेट थे। और अच्छे मित्र भी। इस कारण एएनएम अनीता कुमारी और उनके पति पर प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई।
इसके बावजूद, एएनएम और उनके पति प्रयास करते रहें कि उनका प्रमाण पत्र बन जाय और ये लोग उसमें सफल रहें। चार-चार प्रमाण पत्र बन गये। पांच दिन पूर्व जो प्राथमिकी सिंहवाड़ा थाना में प्रभारी चिकित्सा प्रभारी की ओर से एएनएम और उसके पति पर दर्ज कराई गई उसका वजह यही था कि आयकर में 75 हजार की छूट ली गई।
मामला प्रकाश में आने पर एएनएम से पति के नाम पर जारी चारों विकलांगिता प्रमाण पत्र की मांग की गई थी। लेकिन उनकी ओर से जमा नहीं किये जाने के कारण प्रभारी चिकित्सा प्रभारी ने सिविल सर्जन से मार्गदर्शन मांगा। इस मार्गदर्शन के आलोक में विभाग ने सरकारी अधिवक्ता से विधिक सलाह लिया गया।
सरकारी अधिवक्ता ने पति-पत्नी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की सलाह दी। सिविल सर्जन दरभंगा ने ज्ञापांक 334 दिनांक 2/2/22 को ही कहा था कि दोनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करें। लेकिन, प्रभारी चिकित्सा प्रभारी ने यहां दरिया दिली दिखाई और प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई।
इस पूरे प्रकरण में मजेदार पहलू यह है कि प्रभारी चिकित्सा प्रभारी ने कार्रवाई के बदले 50% का दिव्यांगिता प्रमाण पत्र एएनएम अनीता के पति को दे दिया। उससे भी मजेदार पहलू यह रहा कि इस आलोक में सिविल सर्जन ने भी 16 मार्च 22 को 43% की विकलांगिता प्रमाण पत्र दे दिया।
प्रभारी चिकित्सा प्रभारी की ओर से 50% का प्रमाण पत्र जारी होने से 75 हजार का आयकर में लाभ लें लिया गया। अब ऐसी क्या बात हुई कि जो प्राथमिकी एक वर्ष पहले हो जानी थी जो एक वर्ष बाद की गई। वह भी तब, जब प्रभारी चिकित्सा प्रभारी और सिविल सर्जन कार्रवाई के दिन के बाद प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं।
पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेकर अनुसंधान कर रही हैं। अब इस मामले में जितने दोषी एएनएम और उसके पति दिखाई पर रहें हैं उतने ही दोषी प्रभारी चिकित्सा प्रभारी और सिविल सर्जन हैं। अनुसंधान और पर्यवेक्षण के बाद इन सभी पर गाज गिरना तय है।







