
बिहार कैबिनेट के फैसले: बिहार की नीतीश सरकार ने बुधवार को कई बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। इन फैसलों में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को हरी झंडी मिली।
निजी सीसीटीवी अब सरकारी निगरानी में: बढ़ेगी जन सुरक्षा
राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब निजी प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरे भी सीधे सरकारी निगरानी सिस्टम से जोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘बिहार लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन नियमावली 2026’ को मंजूरी दी गई। इस नियमावली के तहत दुकानों, अस्पतालों, बैंकों, स्कूल-कॉलेज, धार्मिक स्थलों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर सीसीटीवी और सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि यह कदम अपराधियों पर नजर रखने, किसी भी घटना पर तुरंत कार्रवाई करने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाकर जन सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।
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पटना में बनेगा ऑटिज्म सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से प्रभावित बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राजधानी पटना में ऑटिज्म के लिए अत्याधुनिक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र ऑटिज्म से जुड़े मामलों में प्रारंभिक पहचान, थेरेपी, प्रशिक्षण और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनेगा। इसके अतिरिक्त, प्रखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बच्चों में ऑटिज्म और उससे मिलते-जुलते लक्षणों की स्क्रीनिंग के लिए एक सुदृढ़ व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि समय रहते बच्चों को आवश्यक सहायता मिल सके। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पटना के गर्दनीबाग में 4.55 एकड़ भूमि पहले ही चिन्हित की जा चुकी है, जहां अब यह सेंटर स्थापित होगा। यह संस्थान शोध और प्रशिक्षण के जरिए इस क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अन्य प्रमुख बिहार फैसले और महत्वपूर्ण निर्णय
- मेडिकल कॉलेजों में गेस्ट हाउस: इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान सहित सभी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में मरीजों के परिजनों के ठहरने के लिए गेस्ट हाउस का निर्माण किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।
- पेयजल योजनाओं को मंजूरी: मुख्यमंत्री पेयजल निश्चय योजना और अन्य योजनाओं के तहत निर्मित गुणवत्ता प्रभावित एवं गैर-गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों की कुल 20,730 वार्ड आधारित जलापूर्ति योजनाएं और 1133 पाइप जलापूर्ति योजनाओं के लिए 3601 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
- निगरानी अन्वेषण संवर्ग समाप्त: बिहार निगरानी अन्वेषण संवर्ग को समाप्त कर दिया गया है। इस संवर्ग के सभी कार्यरत पदाधिकारियों (पुलिस उपाधीक्षक, पुलिस निरीक्षक व पुलिस अवर निरीक्षक) को गृह विभाग, बिहार पुलिस के संबंधित संवर्ग में समायोजित किया जाएगा।
- साइबर कोषागार का गठन: राज्य मंत्रिपरिषद ने वित्त विभाग के कोषागार एवं लेखा निदेशालय के अंतर्गत साइबर कोषागार के गठन को मंजूरी दी है, जिसके लिए 23 नए पदों का सृजन भी किया गया है।
- संस्थान का नाम बदला: संजय गांधी गव्य प्रावैधिकी संस्थान, पटना का नाम बदलकर ‘बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पटना’ करने को मंजूरी दी गई है।
- नगर निकायों के बिजली बिल बकाया: वर्ष 2025-26 में नगर निकायों के बकाये बिजली बिल के भुगतान के लिए 425 करोड़ रुपये के सहायक अनुदान के रूप में खर्च करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है।
- बिहार खनिज संशोधन नियमावली 2026: मंत्रिमंडल ने इसे स्वीकृति दी है। इसके तहत नदी घाटों या पत्थर खनन पट्टों की बंदोबस्ती के बाद उसे छोडऩे से रोकने, पत्थर खनन पट्टों की नीलामी से अधिकतम राजस्व प्राप्ति सहित नीलामी की राशि के भुगतान के तरीके का निर्धारण करने और ई-नीलामी करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इससे पत्थर का खनन शुरू होगा और राज्य सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी।
- अन्य फैसले:
- गया में फल्गू नदी पर नए पुल के लिए 114 करोड़ रुपये की स्वीकृति।
- मुंगेर के वानिकी महाविद्यालय में 250 नए पद सृजित।
- एससी-एसटी छात्रावास में रहने वाले छात्रों की अनुदान राशि 1000 से बढ़ाकर 2000 रुपये की गई।
इन सभी बिहार कैबिनेट के फैसलों से राज्य में विकास और जन कल्याण को गति मिलेगी।
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