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फ़रवरी, 12, 2026

दादा कहिन ( Deshaj Times Cartoon )

यक्ष प्रश्‍नों में उलझ कर रह गई बूढ़ी सदी ये प्रतीक्षा की घड़ी है क्‍या हमारी प्यास की

यह समय सपनों को तोड़ने का समय है। मगर यकींन मानिए, सपने टूट जरूर रहे हैं, लेकिन यकीन के साथ कह सकता हूं, सपने...

गरीब को मरने की इसलिए जल्दी है साहब, कहीं जिंदगी की कशमकश में कफ़न महंगा ना हो जाए

लाठियां वहीं चटकती है जहां गरीबों का बसेरा होता है। वो एक दौर था जब गरीबी पर तरस खाते थे लोग दौर अब यह...

सावधान हे भ्रष्ट राजनीति, तुम इतना भी ना इतराना,तेरी काली करतूत से वकिफ है आज ये सारा जमाना

घूसखोरी देश से लेकर दरभंगा तक नासूर बनकर सामने है। हालात यह, लाखों का धन है तो भी, क्यों आज भिखारी बन बैठे,काले धन...

हादसे से देर भली सभी बखूबी जानते हैं,मगर वाहन चलाते समय लोग कहां ट्रॅफिक नियमों को मानते हैं

यह देशज की ओर से जनहित में जारी, सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला यूही हैं हमेशा से जारी। कोई नहीं हैं जो ले इन सड़क...
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हमने तो बहारों का, महज़ ज़िक्र सुना है, इस गांव से तो, आज भी पतझर नहीं बदले

बिहार में सुशासन का प्रचार तो खूब किया जाता है पर बिहार की जमीनी हकीकत ठीक इस प्रचार के विपरीत है। आइए बात की...

हॉफ सेंचुरी पार नहीं, मिलती वृद्धावस्था पेंशन है, जो साठ के हो गए, उनको दवा की टेंशन है

सरकार हितैषी योजनाएं गरीबों व बेसहारों से दूर दलालों के चंगुल में बुरी तरह कराहने को विवश है। सरकार की मंशा भले जो है...

देश में फैला इतना भ्रष्टाचार है, व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है,भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है, कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बद-मिज़ाज सी शाम है। शहर का मिजाज बदतर...

ना मैं बदला हूं,ना आदतें बदली हैं, बस वक़्त बदला है और तुम नजरिया बदल लो

लहेरियासराय का नेहरू स्टेडियम। दरभंगा के इतिहास की हर घास गवाह है। कभी दरभंगा महाराज की शान हुआ करता था स्टेडियम। कभी देश के...
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रोज़गार था नहीं मिल रहा, खाली खाली हाथ, चप्पल जूते घिस-घिस टूटे, दिखी नहीं पर आस

धोखा कहूं किस्मत का या कहूं नसीबों की बातें, इसे दिल चीर कर रख दिया तकदीर के धोखे ने, अफसाने वजूद हुआ करते थे...

सोच हमारी जिस दिन बदलेगी, यकीन मानिए देश में गरीबी, भुखमरी दूर तलक नज़र नहीं आएगी

क्या कभी सोचा है तुम कितना लुटाते हो अपनी खुशियां मनाने में, लेकिन जेबें फट जाती हैं लोगों की दूसरों को रोटी खिलाने में।| गज़ब...

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