
बिहार में फिर फर्जी डिग्री पर शिक्षकों की बहाली का पर्दाफाश होने वाला है। कारण, 77 हजार शिक्षकों की फाइल गायब है। इतना ही नहीं यह सभी शिक्षक सरकारी पैसा भी गलत तरीके से उठा रहे हैं। अब ऐसे शिक्षकों पर गाज गिरने वाली है। पढ़िए पूरी खबर
पटना हाइकोर्ट ने राज्य में फर्जी डिग्रीधारी शिक्षकों की नियुक्ति में सुनवाई करते हुए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह और न्यायाधीश मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ ने निगरानी विभाग के उस हलफनामे की सुनवाई की जिसमें कहा गया कि 77 हज़ार ऐसे शिक्षक हैं जिनकी फाइल नहीं मिल रही है।
पिछले ही दिनों पटना हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए यह कहा था कि वह एक समय सीमा निर्धारित करें जिसके तहत सभी संबंधित शिक्षक अपना डिग्री व अन्य कागजात संबंधित पदाधिकारी या कार्यालय में प्रस्तुत कर सकें।
इसके साथ ही निर्धारित समय सीमा के भीतर कागजात व रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें। जिसके बाद अब इस मामले में कल सुनवाई हुई। जिसमें 77 हज़ार ऐसे शिक्षक पाए गए इनका अभी भी हैंजिनकी फाइल नहीं मिल रही है।
रंजीत पंडित की जनहित याचिका पर एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। राज्य सरकार व निगरानी विभाग हलफनामा दायर किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 77 हज़ार ऐसे शिक्षक हैं, जिनका फोल्डर नहीं मिल रहा है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह एक समय सीमा निर्धारित करें, जिसके तहत सभी सम्बंधित शिक्षक अपना डिग्री व अन्य कागजात प्रस्तुत करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय के भीतर कागजात व रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
जानकारी के अनुसार, पटना हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि अगर ऐसे शिक्षक अपना पद स्वयं छोड़ देते हैं तो उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि बड़ी संख्या में जाली डिग्रियों के आधार पर शिक्षक राज्य में काम कर रहे हैं। वे वेतन भी उठा रहे है।
इसके बाद कोर्ट ने वर्ष 2014 के एक आदेश में कहा था कि जो इस तरह की जाली डिग्री के आधार पर राज्य सरकार के तहत शिक्षक है उन्हें एक अवसर दिया जाता है कि वे खुद शिक्षक के पद से इस्तीफा दे दें। इसके बाद भी फर्जी शिक्षक काम करते रहे।
26 अगस्त, 2019 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इस आदेश के बाद भी बड़ी संख्या में इस तरह के शिक्षक कार्यरत है और वेतन ले रहे है। कोर्ट ने मामलें को निगरानी विभाग को जांच के लिए सौंपा था। उन्हें इस तरह के शिक्षकों को ढूंढ निकालने का निर्देश दिया।
31 जनवरी, 2020 के सुनवाई दौरान निगरानी विभाग ने कोर्ट को जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा इनके सम्बंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है, लेकिन अभी भी एक लाख दस हजार से अधिक शिक्षकों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
साथ ही ये भी पाया गया कि 1316 शिक्षक बिना वैध डिग्री के नियुक्त किये गए।कोर्ट ने इस मामलें को काफी गम्भीरता से लिया।कोर्ट ने सम्बंधित विभागीय सचिव से हलफनामा दायर कर स्थिति का ब्यौरा देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अगली सुनवाई में अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया था। इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि बड़ी संख्या में जाली डिग्रियों के आधार पर शिक्षक राज्य में काम कर रहे हैं।साथ ही वे वेतन उठा रहे है। इससे पूर्व कोर्ट ने 2014 के एक आदेश में कहा था कि जो इस तरह की जाली डिग्री के आधार पर राज्य सरकार के तहत शिक्षक है,उन्हें ये अवसर दिया जाता है कि वे खुद अपना इस्तीफा दे दें, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाएगी।






