
बाल रेस्क्यू: मध्यप्रदेश के कटनी में बाल तस्करी के शक में रेस्क्यू किए गए 144 बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति द्वारा अररिया वापस ले आया गया है। ये सभी बच्चे अररिया जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों के रहने वाले हैं और इन्हें महाराष्ट्र के लातूर स्थित मदरसे में दीनी तालीम के लिए ले जाया जा रहा था।
मध्यप्रदेश के कटनी में दो सप्ताह पहले चाइल्डलाइन ने मानव तस्करी के संदेह में कुल 167 बच्चों को हिरासत में लिया था। इनमें से 144 बच्चे अररिया जिले के थे, जबकि बाकी सीमांचल के अन्य जिलों से संबंध रखते थे।
कटनी में कैसे और क्यों हुआ बाल रेस्क्यू?
कटनी चाइल्डलाइन को शक था कि इन बच्चों की तस्करी की जा रही है। लातूर के मदरसा प्रबंधन से संपर्क साधा, लेकिन मदरसा समिति ने बच्चों के गायब होने या किसी अन्य मामले में अपनी जवाबदेही से इनकार कर दिया। इसके बाद कटनी चाइल्डलाइन ने अररिया जिला प्रशासन से संपर्क किया, जिसके फलस्वरूप ये बच्चे अररिया वापस लाए गए। इस पूरे बाल रेस्क्यू अभियान में प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही।
अररिया के कुछ बच्चे ओडिशा में भी रेस्क्यू किए गए हैं, जिन्हें जल्द ही वापस लाया जाएगा। ओडिशा के जिस मदरसे में इन्हें भेजा गया था, उसकी मान्यता भी समाप्त हो चुकी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अक्सर देखा जाता है कि गरीबी और मुफलिसी के कारण अभिभावक अपने बच्चों को मुफ्त दीनी तालीम के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में भेज देते हैं, लेकिन वहां उनके साथ क्या होता है, इस पर कोई निगरानी नहीं होती।
कई स्थानों से बच्चों से बाल श्रम कराने के मामले भी सामने आते रहे हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बच्चों की काउंसिलिंग और अभिभावकों को सुपुर्दगी
अररिया पहुंचने पर जिला बाल कल्याण समिति द्वारा सभी बच्चों की गहन काउंसिलिंग की गई। काउंसिलिंग के बाद सभी बच्चों को उनके अभिभावकों को सुरक्षित सौंप दिया गया। इस प्रक्रिया से बच्चों के मन-मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने का प्रयास किया गया। जिलाधिकारी विनोद दूहन के दिशा निर्देश में जिला बाल कल्याण समिति एवं जिला प्रशासन अररिया, के माध्यम से कुल 144 बच्चों को उनके परिजनों के बीच सुरक्षित रूप से पुनर्वासित किया गया।







