
Millet Processing Unit: भागलपुर में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है! अब महिलाओं को न सिर्फ सशक्तिकरण का मौका मिलेगा, बल्कि उन्हें श्री अन्न (मोटे अनाज) प्रसंस्करण के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह भी दिखाई जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्र में शुरू हुई यह इकाई बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आयाम देगी, और साथ ही पोषण सुरक्षा को भी बढ़ावा देगी।
Millet Processing Unit: क्या है यह पहल?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘श्री अन्न (मिलेट्स) मिशन’ को आगे बढ़ाते हुए, भागलपुर के सबौर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में एक आधुनिक Millet Processing Unit का शुभारंभ किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के अंतर्गत 21 कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं। फ़िलहाल इस यूनिट की शुरुआत भागलपुर से हुई है, लेकिन आने वाले समय में इसे सभी कृषि विज्ञान केंद्रों तक विस्तारित किया जाएगा। ख़ासकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाओं को इसमें प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि श्री अन्न न केवल पोषण से भरपूर हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी एक मज़बूत माध्यम हैं। इस यूनिट के माध्यम से किसानों को प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकें।
तकनीक और रोज़गार के अवसर
यह आधुनिक इकाई भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान (IIMR) द्वारा प्रायोजित है। इसे अनुसूचित जाति उप योजना (SCSP) के तहत स्थापित किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य तकनीकी सहयोग, कौशल विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, खासकर महिलाओं के लिए, जिससे उनके Women Empowerment को बल मिले।
इस अत्याधुनिक यूनिट में कुल 10 उन्नत मशीनें लगाई गई हैं, जिनकी मदद से चीना, कोदो, मडुआ (रागी), कुटकी, सांवा और बाजरा जैसे विभिन्न मिलेट्स की सफाई, छिलाई, ग्रेडिंग, पिसाई और पैकेजिंग आसानी से की जा सकेगी। इसके साथ ही, इन मिलेट्स से आटा, दलिया, रेडी-टू-कुक (पकाने के लिए तैयार) और रेडी-टू-ईट (खाने के लिए तैयार) उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे।
पोषण, सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास
डॉ. सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि यह पहल न केवल किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर बाज़ार मूल्य दिलाने में मदद करेगी, बल्कि पोषण सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार सृजन की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह इकाई स्थानीय स्तर पर मोटे अनाजों के उत्पादन और खपत को बढ़ावा देकर एक स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करेगी, साथ ही ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार लाएगी, जो समग्र Women Empowerment के लिए महत्वपूर्ण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।






